नई दिल्ली: कांग्रेस ने ‘वोट चोरी’ के खिलाफ चलाए जा रहे अपने अभियान को और तेज करते हुए आज दिल्ली के रामलीला मैदान में विशाल रैली आयोजित करने का ऐलान किया है। पार्टी ने दावा किया है कि इस मुद्दे पर देशभर से 5.5 करोड़ से अधिक हस्ताक्षर एकत्र किए गए हैं, जिन्हें राष्ट्रपति को सौंपने के लिए मुलाकात का अनुरोध किया गया है।
कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने जानकारी दी कि रैली के बाद ‘वोट चोरी’ के खिलाफ एक ज्ञापन राष्ट्रपति को सौंपा जाएगा। उन्होंने कहा, “राहुल गांधी ने सबूतों के साथ दिखाया है कि वोट चोरी कैसे की जा रही है। उन्होंने गृह मंत्री को बहस की चुनौती दी, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला।”
रैली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, के.सी. वेणुगोपाल, जयराम रमेश, डी.के. शिवकुमार, सिद्धारमैया, सचिन पायलट और अन्य वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के भी उपस्थित रहने की संभावना है।
सुबह वरिष्ठ नेता इंदिरा भवन स्थित पार्टी मुख्यालय में जुटेंगे और बसों से रामलीला मैदान पहुंचेंगे।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि लोकतंत्र तभी मजबूत रहता है जब हर नागरिक के वोट की बराबर कीमत हो। उन्होंने आरोप लगाया कि “बीजेपी और आरएसएस लोकतंत्र की इस मूल भावना पर हमला कर रहे हैं। वोट चोरी सिर्फ चुनावी गड़बड़ी नहीं, बल्कि यह नागरिकों की आवाज़ और अधिकार पर सीधा प्रहार है।”
कांग्रेस की सोशल मीडिया प्रमुख सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि संविधान द्वारा दिए गए वोट के अधिकार पर हमला हो रहा है। उन्होंने कहा, “वोटर लिस्ट में धांधली, एसआईआर की मनमानी और ईवीएम में गड़बड़ी के जरिए लोकतंत्र की आत्मा के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। अब वक्त है कि देश की जनता इस वोट चोरी के खिलाफ आवाज उठाए।”
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि ‘वोट चोरी’ के खिलाफ यह लड़ाई लोकतंत्र और जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए है। उन्होंने लोगों से रैली में शामिल होकर अपनी आवाज बुलंद करने की अपील की।
कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट ने भी कहा कि 14 दिसंबर को ‘वोट चोर – गद्दी छोड़’ रैली के जरिए कांग्रेस चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाएगी और जनता से इस आंदोलन में जुड़ने की अपील करेगी।
यह रैली लोकसभा में हाल ही में हुए चुनावी सुधारों को लेकर विपक्ष और सरकार के बीच हुई तीखी बहस के कुछ दिनों बाद हो रही है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार और चुनाव आयोग से इस मुद्दे पर अब तक कोई जवाब नहीं मिला है।
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