नई दिल्ली: ऑल इंडिया यूनानी तिब्बी कांग्रेस (दिल्ली स्टेट) की हाल ही में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में ऐतिहासिक आयुर्वेदिक एवं यूनानी तिब्बिया कॉलेज को विश्वविद्यालय का दर्जा देने और पिछले एक दशक से भंग पड़ी दिल्ली भारतीय चिकित्सा परिषद (DBCP) का जल्द पुनर्गठन करने की पुरजोर मांग उठाई गई है।
बैठक को संबोधित करते हुए संगठन के महासचिव डॉ. सैयद अहमद खान ने कहा कि यूनानी और आयुर्वेदिक चिकित्सा के लाभों को आम जनता तक जमीनी स्तर पर पहुंचाने तथा शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए तिब्बिया कॉलेज को विश्वविद्यालय में बदलना बेहद जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस ऐतिहासिक संस्थान के पास 25 एकड़ से अधिक विशाल भूमि और बुनियादी शैक्षणिक ढांचा पहले से मौजूद है, इसलिए इसके विस्तार में कोई बड़ा वित्तीय संकट आड़े नहीं आएगा।
डॉ. खान के अनुसार, कॉलेज में वर्तमान में आयुर्वेद और यूनानी की दो फैकल्टियां कार्यरत हैं। यहां ‘रेजिमेंनल थेरेपी’ (Regimenal Therapy) की नई फैकल्टी स्थापित की जा सकती है और अन्य 14 विभागों को चरणबद्ध तरीके से विकसित कर पूर्ण विश्वविद्यालय का रूप दिया जा सकता है। इसके लिए केवल सरकार की ओर से गंभीर और व्यावहारिक पहल की आवश्यकता है।
हिंदुस्तानी दवाखाना को फिर से शुरू करने की अपील
बैठक में चिकित्सकों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए पिछले 10 वर्षों से भंग पड़ी दिल्ली भारतीय चिकित्सा परिषद (DBCP) के तुरंत गठन की मांग दोहराई गई। इसके साथ ही स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मसीह-उल-मुल्क हकीम अजमल खान द्वारा स्थापित ‘हिंदुस्तानी दवाखाना’ को पुनः शुरू करने की अपील की गई, ताकि आम लोगों को किफायती दरों पर गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
डॉ. शकील अहमद की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में सर्वसम्मति से सरकार से इन मांगों पर तत्काल कदम उठाने का आग्रह किया गया। कार्यक्रम में डॉ. एहसान अहमद सिद्दीकी, डॉ. महमूद आलम, डॉ. गयासुद्दीन सिद्दीकी, डॉ. फैजान अहमद सिद्दीकी, डॉ. शम्सुद्दीन आजाद, डॉ. फहीम मलिक और एडवोकेट शाह जबीं काजी सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। अंत में डॉ. खुर्शीद आलम ने सभी प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
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