नई दिल्ली: राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद (NCPUL) के वर्तमान निदेशक डॉक्टर शम्स इकबाल की गंभीर प्रशासनिक कोशिशों को एक बड़ी सफलता मिली है। परिषद में पिछले लगभग 5 वर्षों से ठप पड़ी फाइनेंस कमेटी (वित्त समिति) का आखिरकार पुनर्गठन कर दिया गया है।
प्रामाणिक सूत्रों ने ‘ग्लोबलटुडे’ को जानकारी दी है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने इस महत्वपूर्ण वित्तीय समिति के गठन को हरी झंडी दे दी है। इस फैसले को डॉ. शम्स इकबाल के कार्यकाल की एक बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है, जिससे परिषद के वित्तीय मामलों को नई गति मिलेगी।
डॉ. शम्स इकबाल ने विपरीत परिस्थितियों में संभाला था मोर्चा
सूत्रों के मुताबिक, जब डॉ. शम्स इकबाल ने NCPUL के निदेशक का पदभार संभाला था, तब संस्थान व्यावहारिक रूप से गंभीर प्रशासनिक और वित्तीय गतिरोध से जूझ रहा था। पूर्व निदेशक डॉ. शेख अकील के कार्यकाल के दौरान साल 2021 में ही फाइनेंस कमेटी की अवधि समाप्त हो चुकी थी।
विगत वर्षों में नई कमेटी न होने के कारण परिषद के वित्तीय और प्रशासनिक मामले बुरी तरह प्रभावित थे और संस्थान के कामकाज की रफ्तार लगभग थम सी गई थी। इसके बावजूद, डॉ. इकबाल ने सीमित संसाधनों और गंभीर चुनौतियों के बीच न सिर्फ संस्थान की दैनिक गतिविधियों को सुचारू रूप से बनाए रखा, बल्कि विभिन्न महत्वपूर्ण परियोजनाओं को भी जीवित रखने की पूरी कोशिश की।
शिक्षा मंत्रालय के समक्ष लगातार उठाई आवाज
निदेशक का पद संभालते ही डॉ. शम्स इकबाल ने इस मुद्दे को अपनी शीर्ष प्राथमिकताओं में रखा। उन्होंने परिषद की रुकी हुई परियोजनाओं को दोबारा शुरू करने के लिए शिक्षा मंत्रालय के समक्ष लगातार पैरवी की और फाइनेंस कमेटी के गठन के लिए गंभीर प्रयास जारी रखे। उनके इसी निरंतर प्रयास का नतीजा है कि मंत्रालय ने आखिरकार इस महत्वपूर्ण फाइल को मंजूरी दे दी है।
इन रुकी हुई योजनाओं को दोबारा शुरू करने की चुनौती
फाइनेंस कमेटी की मंजूरी न होने के कारण परिषद के दर्जनों प्रोजेक्ट्स पिछले कई वर्षों से अधर में लटके थे। अब उम्मीद है कि डॉ. शम्स इकबाल के नेतृत्व में इन योजनाओं को तुरंत हरी झंडी मिल सकेगी:
- ग्रांट-इन-एड (Grant-in-Aid) की विभिन्न रुकी हुई योजनाएं।
- उर्दू प्रकाशन (Publications) से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजनाएं।
- देशभर में चलने वाले विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम (Training Programs)।
कार्यकाल के अंतिम चरण में एक बड़ा और सकारात्मक मोड़
दिलचस्प बात यह है कि फाइनेंस कमेटी का यह गठन ऐसे समय में हुआ है जब डॉक्टर शम्स इकबाल का कार्यकाल अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है। अब उर्दू हलकों (साहित्यिक और सामाजिक क्षेत्रों) की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि वे अपने बचे हुए कार्यकाल में इस नई कमेटी के जरिए कितनी तेजी से लंबित परियोजनाओं को धरातल पर उतार पाते हैं।
साहित्यिक हलकों में डॉ. शम्स इकबाल की सराहना: उर्दू से जुड़े बुद्धिजीवियों, साहित्यकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने फाइनेंस कमेटी के इस गठन का स्वागत किया है और इसके लिए निदेशक डॉ. शम्स इकबाल के विजन और प्रयासों की सराहना की है। उम्मीद जताई जा रही है कि उनके इस प्रयास से राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद के कामकाज में एक नई जान आएगी।
