हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य क्रांति: चिकित्सा संस्थानों के आधुनिकीकरण के लिए ₹1617 करोड़ स्वीकृत

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शिमला | 15 फरवरी, 2026: हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने 3,000 करोड़ रुपये की स्वास्थ्य आधुनिकीकरण पहल के प्रथम चरण के लिए 1,617 करोड़ रुपये की मंजूरी दे दी है। इस भारी निवेश का मुख्य उद्देश्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों और सुपर स्पेशियलिटी संस्थानों का कायाकल्प करना है।

2031 तक पूरा होगा आधुनिकीकरण का लक्ष्य

यह महत्वाकांक्षी परियोजना 1 अप्रैल, 2026 से शुरू होकर 30 अप्रैल, 2031 तक लागू की जाएगी। राज्य सरकार का लक्ष्य दूरदराज के क्षेत्रों तक उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाना और मरीजों को इलाज के लिए प्रदेश से बाहर जाने की मजबूरी को खत्म करना है।

परियोजना की मुख्य विशेषताएं और तकनीक:

  • अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक सुविधाएं: एआई-सक्षम हैंडहेल्ड एक्स-रे और उन्नत इमेजिंग उपकरण।
  • डिजिटल हेल्थ: एकीकृत डिजिटल स्वास्थ्य प्लेटफॉर्म और टेलीमेडिसिन का विस्तार।
  • स्मार्ट ट्रेनिंग: मेडिकल छात्रों के लिए सिमुलेशन-आधारित प्रशिक्षण और एआर/वीआर (AR/VR) लैब।
  • रोबोटिक सर्जरी: आईजीएमसी शिमला और टांडा के बाद अब अन्य मेडिकल कॉलेजों में भी रोबोटिक सर्जरी की सुविधा मिलेगी।

तीन चरणों में बदलेगी स्वास्थ्य व्यवस्था की तस्वीर

सरकार ने इस निवेश को सुव्यवस्थित तरीके से खर्च करने के लिए तीन चरणों की रूपरेखा तैयार की है:

चरणमुख्य फोकस क्षेत्रप्रमुख सुविधाएं
प्रथम चरणबुनियादी ढांचा और डिजिटल शिक्षानए भवन, ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म, एमआरआई, सीटी स्कैनर और मॉलिक्यूलर लैब।
द्वितीय चरणतृतीयक और सुपर स्पेशियलिटी सेवाएंबोन मैरो ट्रांसप्लांट, न्यूरोसर्जरी, रोबोटिक सर्जरी और उन्नत बाल चिकित्सा केंद्र।
तृतीय चरणआदर्श स्वास्थ्य संस्थानजिला अस्पतालों में सीटी स्कैनर, मोबाइल एक्स-रे और डिजिटल रेफरल नेटवर्क।

बाहर इलाज कराने से जीडीपी को हो रहा ₹1350 करोड़ का नुकसान

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, हर साल लगभग 9.5 लाख मरीज बेहतर इलाज की तलाश में हिमाचल से बाहर जाते हैं। इससे राज्य की जीडीपी को सालाना 1,350 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान होता है। सरकार का अनुमान है कि राज्य में ही बेहतर सुविधाएं मिलने से न केवल मरीजों का समय बचेगा, बल्कि प्रतिवर्ष लगभग 550 करोड़ रुपये की जीडीपी बचत भी होगी।

मुख्यमंत्री का विजन: > “हमारी सरकार हिमाचल को स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में देश का अग्रणी राज्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। आधुनिक तकनीक और बेहतर बुनियादी ढांचे से हम यह सुनिश्चित करेंगे कि हर नागरिक को समय पर और सस्ता इलाज मिले।” — ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू, मुख्यमंत्री

समय पर निदान से कम होगी इलाज की लागत

अध्ययनों के हवाले से प्रवक्ता ने बताया कि बीमारी का देरी से पता चलने पर इलाज का खर्च 30 से 50 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। इस परियोजना के माध्यम से सरकार डायग्नोसिस (जांच) की प्रक्रिया को तेज करेगी, जिससे मरीजों पर आर्थिक बोझ कम होगा और उनके जीवन की रक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।

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