मंडलायुक्त के भागीरथ प्रयासों से मुरादाबाद मंडल को मिली अनेक सौगातें

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मुरादाबाद: मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह के लगभग 62 माह के कार्यकाल में मुरादाबाद मंडल ने विकास के हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छुआ है। उनके कुशल नेतृत्व के चलते आज मुरादाबाद मंडल उत्तर प्रदेश के अग्रणी मंडलों में शुमार है।

ऐतिहासिक सफर: फर्श से अर्श तक

उत्तर प्रदेश के 18 मंडलों में मुरादाबाद को 14 सितंबर 1980 को 12वें मंडल के रूप में स्थापित किया गया था। अपने लगभग 46 वर्षों के सफर में इस मंडल ने विकास का एक लंबा रास्ता तय किया है। आज मुरादाबाद मंडल के पांचों जनपद— बिजनौर, मुरादाबाद, रामपुर, अमरोहा और संभल— अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं। जहाँ रामपुर में विश्व प्रसिद्ध रजा लाइब्रेरी है, वहीं अन्य जिले भी अपनी शिल्पकला और संस्कृति के लिए विख्यात हैं।

विकास के नए आयाम

वर्ष 2005 बैच के आईएएस अधिकारी आंजनेय कुमार सिंह ने 6 मार्च 2021 को मंडलायुक्त का पदभार संभाला था। उनके कार्यकाल में मंडल की आधारभूत संरचना में भारी सुधार हुआ है:

सड़कों का कायाकल्प: लोक निर्माण विभाग (PWD), ग्रामीण अभियंत्रण सेवा (RES), नगर निगम और जिला पंचायतों के समन्वय से सड़कों की स्थिति में क्रांतिकारी बदलाव आया है।

शहरी सौंदर्यीकरण: मुरादाबाद महानगर में साहित्य पथ, संस्कृति पथ, सात अजूबे, हनुमान वाटिका, अटल पथ और छठ पूजा घाट का निर्माण जन-आकांक्षाओं के अनुरूप किया गया है।

प्रमुख परियोजनाएं: पिछले पांच वर्षों में मंडल को हवाई पट्टी, रिंग रोड, मैंगो पैक हाउस, नंदी विहार, सद्भावना मंडप, महात्मा विदुर राजकीय मेडिकल कॉलेज, अटल आवासीय विद्यालय और गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय जैसी महत्वपूर्ण सौगातें मिली हैं।

तकनीकी एवं पर्यावरण: मंडल में आईसीसीसी (I-Triple C), कूड़ा-कर्कट अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्र, वॉर मेमोरियल और नक्षत्रशाला का निर्माण भी मील का पत्थर साबित हुआ है।

स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार

स्वास्थ्य के क्षेत्र में मंडल के सभी सीएमओ (CMO) और सीएमएस (CMS) सक्रियता से कार्य कर रहे हैं, जिससे चिकित्सा सुविधाओं में भारी सुधार आया है। अमरोहा में नई तहसील का निर्माण भी प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है।

भविष्य की राह: मेट्रो और एम्स की दरकार

लगभग 2 करोड़ (सटीक आंकड़ा 1 करोड़ 80 लाख) की आबादी वाले इस मंडल में अब मेट्रो और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की कमी महसूस की जा रही है। ये दोनों बड़े प्रोजेक्ट केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से ही संभव हैं। यदि मुरादाबाद में एम्स की स्थापना होती है, तो न केवल स्थानीय जनता बल्कि पड़ोसी राज्य उत्तराखंड के एक बड़े हिस्से को भी बेहतर स्वास्थ्य लाभ मिल सकेगा।

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