नई दिल्ली/गाजियाबाद: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने शनिवार को गाजियाबाद के लोनी से 25 साल से फरार चल रहे घोषित अपराधी सलीम वास्तिक (उर्फ सलीम अहमद/सलीम खान) को गिरफ्तार कर लिया है। वह 1995 में पूर्वोत्तर दिल्ली के एक कारोबारी के 13 वर्षीय बेटे संदीप बंसल के अपहरण और हत्या के मामले में दोषी पाया गया था और उसे इस जुर्म के लिए उम्रकैद की सजा हुई थी।
क्या है पूरा मामला?
सलीम वास्तिक पूर्वोत्तर दिल्ली स्थित एक स्कूल में मार्शल आर्ट्स इंस्ट्रक्टर के तौर पर काम करता था और संदीप बंसल उसी स्कूल में पढ़ता था। जांच में सामने आया कि सलीम ने बच्चे का अपहरण कर फिरौती की मांग की और फिर उसकी हत्या कर शव को नाले में फेंक दिया था।
पुलिस की क्राइम ब्रांच ने उसे न्यायालय से उम्रकैद की सजा दिलवाई, लेकिन वह साल 2000 में जमानत पर जेल से बाहर आया और फरार हो गया। अपनी पहचान बदल‑बदलकर विभिन्न राज्यों में छिपकर रहने वाला सलीम पिछले कुछ सालों से गाजियाबाद के लोनी इलाके में रह रहा था और सोशल मीडिया पर “एक्स‑मुस्लिम यूट्यूबर” के रूप में सक्रिय था।
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने पुराने रिकॉर्ड्स और फिंगरप्रिंट मिलान के आधार पर उसकी पहचान सुनिश्चित की और शनिवार को उसे छापे के जरिए गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, यह गिरफ्तारी 31 साल पुराने अपहरण और हत्या के मामले में न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ी सफलता है।
राजनीतिक तूफान और दानिश अली के आरोप
सलीम वास्तिक की गिरफ्तारी के बाद इस मामले को लेकर राजनीति भी गरमा गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद दानिश अली ने उत्तर प्रदेश सरकार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि “सलीम जैसे अपराधी का महिमामंडन राज्य सरकार के कुछ लोगों द्वारा किया जा रहा था, जबकि आज उसका असली चेहरा बेनकाब हो गया है तो उन्हें जवाब देना चाहिए।”
‘फेक एनकाउंटर’ पर भी सवाल
दानिश अली ने पुराने जीशान–गुलफाम एनकाउंटर मामले को भी ताजा कर दिया है। उनका आरोप है कि जब सलीम वास्तिक पर हाल में जानलेवा हमला हुआ था, तो इसके बाद गाजियाबाद पुलिस ने सैद नंगली गांव के दो मासूम भाइयों के खिलाफ एनकाउंटर की कार्रवाई की, जिसे वह “फेक एनकाउंटर” बता रहे हैं। अली का कहना है कि यह कार्रवाई मुख्यमंत्री द्वारा किए गए ट्वीट और राजनीतिक दबाव में की गई, जिसमें अपराधियों को न बख्शने की बात कही गई थी।
अली ने इस घटना को लेकर भावुक होते हुए पूछा है कि आज मुख्यमंत्री और पुलिस उन मासूम बच्चों को उनके माता‑पिता को लौटा सकते हैं या नहीं, क्योंकि वहां के परिवार आज भी इंसाफ की मांग और आंसू के साथ जी रहे हैं।
न्याय और कानून‑व्यवस्था पर नए सवाल
सलीम वास्तिक की गिरफ्तारी ने न केवल एक पुराने जघन्य अपराध के लिए न्याय की राह खोली है, बल्कि यूपी सरकार की कानून‑व्यवस्था, पुलिस कार्यप्रणाली और एनकाउंटर की पारदर्शिता पर भी नए सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष अब इस मामले को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार को घेरने की तैयारी कर रहा है और न्याय की चल‑रही मांगों को ताजा कर रहा है।
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