Opinion

पंक्ति के अंतिम व्यक्ति का भला करना होगा, तब …’ -कलीमुल हफ़ीज़

1947 में जब हमारे देश का बंटवारा हुआ, उस समय हमारे पास दो विकल्प थे, पाकिस्तान जैसा धार्मिक देश बनना या फिर एक लोकतांत्रिक...

यक़ीं लुटा के उठ गए, गुमां बचा के रख दिया- यावर रहमान

अहानते रसूल कोई नया मसला नहीं है बल्कि यह एक मुस्तक़िल मसला है। इसकी शुरुआत मक्का की वादियों में पहले पहल गूंजने वाली दावत...

‘श्रीलंका की इबरतनाक सूरत ए हाल से क्या हम सबक़ ले सकते हैं?’

याद रखिये लोकतंत्र के स्तंभों को खंडित करके कोई भी देश विकास के शिखर पर नहीं पहुँच सकता- कलीमुल हफ़ीज़ इतिहास को पढ़ने से इस...

क्या क़ुदरत ने इंसान को मांसाहारी बनाया है? – सय्यैद मो. काज़िम

प्रकृति के कुछ नियम हैं जिन्हे त्याग कर संसार में जीवित रहना मुमकिन नहीं है। उन्हीं नियम में से एक है खाद्य श्रृंखला यानी...

अरब शासकों का आक्रोश: भारतीय मुसलमान नहीं, इस्लाम है निशाने पर

'काल्पनिक सीमाओं' के समर्थकों से चुनौतियों का सामना कर रहा भारत, 'हिंदू राष्ट्र का रोमांस हमें एक साथ नष्ट कर देगा' पैगंबर मुहम्मद (सल्ललाहु अलईहेवसल्लम)...

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