प्रधानमंत्री मोदी ने ‘मिशन प्रमुख सम्मेलन’ को किया संबोधित; 2047 के ‘विकसित भारत’ के लिए दिया कूटनीतिक मंत्र

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नई दिल्ली | 30 अप्रैल, 2026: नई दिल्ली स्थित कृषि विज्ञान परिसर में आयोजित विदेश मंत्रालय के 11वें मिशन प्रमुख सम्मेलन (HoM) का आज समापन हो गया। सम्मेलन के अंतिम दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिरकत की और दुनिया भर में तैनात भारत के राजदूतों और उच्चायुक्तों को संबोधित किया। इस वर्ष के सम्मेलन का मुख्य विषय ‘2047 के लिए भारतीय कूटनीति में सुधार’ रखा गया था।

वैश्विक भागीदारी और 3T पर जोर

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के माध्यम से सम्मेलन के अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि चर्चा का मुख्य केंद्र भारत की वैश्विक उपस्थिति को सशक्त बनाना था। प्रधानमंत्री ने कहा:

“हमने व्यापार, प्रौद्योगिकी और रणनीतिक साझेदारियों को आगे बढ़ाकर भारत की वैश्विक भागीदारी को मजबूत करने और प्रवासी भारतीयों के साथ संबंधों को और गहरा करने पर व्यापक चर्चा की।”

प्रधानमंत्री को इस दौरान 3T (व्यापार, प्रौद्योगिकी और पर्यटन) को बढ़ावा देने और ‘भविष्य के लिए तैयार कूटनीति’ (Future-ready Diplomacy) पर विशेष प्रस्तुतियां दी गईं।

सम्मेलन की मुख्य बातें:

  • विकसित भारत @2047: प्रधानमंत्री ने मिशन प्रमुखों को मार्गदर्शन देते हुए बताया कि 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में कूटनीति की क्या भूमिका होगी।
  • युवा और वरिष्ठ राजनयिकों का संगम: पीएम मोदी ने न केवल वरिष्ठ अधिकारियों के विचार सुने, बल्कि युवा राजनयिकों के दृष्टिकोण को भी समझा ताकि कूटनीति में नए विचारों का समावेश हो सके।
  • व्यापक चर्चा सत्र: तीन दिवसीय इस सम्मेलन में योग सत्र, विचार-मंथन (Brainstorming), टेबल-टॉप अभ्यास और उभरती प्रौद्योगिकियों जैसे विषयों पर गहन विमर्श हुआ।

विदेश मंत्री का संबोधन

इससे पूर्व, 29 अप्रैल को सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने वैश्विक अस्थिरता के बीच भारतीय राजनयिकों की भूमिका को रेखांकित किया था। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में विश्व के साथ भारत की भागीदारी का अभूतपूर्व विस्तार हुआ है और भारतीय कूटनीति अब राष्ट्रीय हितों को सुरक्षित करने के लिए पूरी तरह तत्पर है।

निष्कर्ष: यह सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित किया गया है जब वैश्विक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में, इस सम्मेलन ने भारतीय मिशन प्रमुखों को एक स्पष्ट रोडमैप प्रदान किया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के प्रभाव और ‘भारत की गाथा’ (India Story) को और अधिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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