रामपुर(अरमान खान): सपा के कद्दावर नेता आजम खां के करीबी पूर्व पालिकाध्यक्ष अजहर अहमद खां को आखिरकार हाईकोर्ट से राहत मिल गई है। हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद शुक्रवार को सभी कागजी कार्रवाई पूरी कर ली गई थी। सुबह ही सपा नेता उनको लेने के लिए बिजनौर जेल पहुंच गए थे।
परवाना आदि दाखिल होने के बाद पूर्व पालिकाध्यक्ष को जमानत पर रिहा कर दिया गया। जेल से बाहर आते ही सपाइयों ने फूल-माला पहनाकर उनका स्वागत किया। दोपहर बाद वह रामपुर स्थित अपने आवास पर पहुंच गए, जहां पर भी तमाम मिलने वालों ने उनका स्वागत किया।
राजनीतिक सफर और रसूख
वर्ष 2012 में प्रदेश में सपा सरकार बनने के बाद हुए निकाय चुनाव में अजहर अहमद खां ने पालिकाध्यक्ष का चुनाव जीता था। अजहर अहमद खां सपा के कद्दावर नेता आजम खां के काफी करीबी हैं, जिस कारण उन्होंने कम समय में ही सियासत में अच्छा मुकाम हासिल कर लिया था।
वह कभी नगर पालिका में एक वार्ड के सभासद हुआ करते थे, लेकिन आजम खां से नजदीकियां बढ़ीं, तो उसी नगर पालिका के चेयरमैन बन गए। वह 2012 में पहली बार नगर पालिका के चेयरमैन बने थे। इसके बाद तो उन्होंने पलटकर नहीं देखा। उनके पांच साल के कार्यकाल के दौरान शहर में कई इमारतें टूटीं और नवाबी दौर में बने गेट तक तोड़ दिए गए। हालांकि, इन इमारतों का नए सिरे से निर्माण भी हुआ; शॉपिंग कॉम्प्लेक्स से लेकर कई नए गेट बने।
2017 का चुनाव और कानूनी शिकंजा
इसके बाद 2017 में फिर निकायों के चुनाव हुए, जिसमें रामपुर नगर पालिका की सीट महिला के लिए आरक्षित हो गई। आजम खां से करीबी होने की वजह से वह फिर से टिकट लेने में कामयाब हो गए और अपनी पत्नी फात्मा जबीं को नगर पालिका अध्यक्ष का दावेदार बना दिया।
सूबे में भाजपा की सरकार बन चुकी थी, लेकिन इसके बाद भी वह अकेले ही 42.47 प्रतिशत मत हासिल कर जीत दर्ज करने में कामयाब रहे।
इससे उनका रसूख और बढ़ गया, लेकिन जब कानूनी शिकंजा कसना शुरू हुआ तो एक के बाद एक उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज होते गए। इसके साथ ही उनकी सियासी चमक भी फीकी पड़ गई। तोड़फोड़ करने, मारपीट करने और लूट आदि समेत विभिन्न आरोपों में उन पर कई मुकदमे दर्ज हुए। कोर्ट में पेश न होने और फरार रहने के कारण उनके घर की कुर्की तक की गई थी।
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