नई दिल्ली: फरवरी 2020 में हुए दिल्ली दंगों की कथित साजिश से जुड़े गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) मामले में आज दोपहर 2:30 बजे दिल्ली हाईकोर्ट अपना महत्वपूर्ण फैसला सुनाएगा। न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति शालिंदर कौर की खंडपीठ यह ऐतिहासिक निर्णय देगी।
मामले की वर्तमान स्थिति
9 जुलाई को सुरक्षित रखा गया था फैसला
इस मामले में शरजील इमाम, उमर खालिद, मोहम्मद सलीम खान, शिफा-उर-रहमान, अतहर खान, मीरान हैदर, अब्दुल खालिद सैफी, गुलफिशा फातिमा और शदाब अहमद की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने 9 जुलाई को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
इसके साथ ही, न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद और न्यायमूर्ति हरीश वैद्यनाथन शंकर की समन्वयक पीठ सुबह 10:25 बजे सह-आरोपी तस्लीम अहमद की जमानत याचिका पर भी फैसला सुनाएगी।
अभियोजन पक्ष का कड़ा रुख
सॉलिसिटर जनरल का तर्क
अभियोजन पक्ष की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इन जमानत याचिकाओं का कड़ा विरोध करते हुए कहा था कि यह केवल दंगे का मामला नहीं है, बल्कि “एक सोची-समझी साजिश थी जिसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर भारत को बदनाम करना था”।
मेहता ने अदालत के समक्ष तर्क दिया था: “अगर आप अपने देश के खिलाफ कुछ भी करते हैं, तो बेहतर होगा कि आप बरी होने तक जेल में ही रहें।” उन्होंने यह भी कहा कि केवल लंबी कैद जमानत का आधार नहीं हो सकती।
बचाव पक्ष के तर्क
उमर खालिद की ओर से दलील
वरिष्ठ अधिवक्ता त्रिदीप पैस ने उमर खालिद की ओर से तर्क दिया था कि केवल व्हाट्सएप ग्रुप में होना, बिना कोई संदेश भेजे, कोई अपराध नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि खालिद से कोई रिकवरी नहीं हुई है और 23-24 फरवरी 2020 की रात की कथित गुप्त बैठक बिल्कुल भी गुप्त नहीं थी।
शरजील इमाम का पक्ष
अधिवक्ता तालिब मुस्तफा ने शरजील इमाम की ओर से कहा था कि वह सभी सह-आरोपियों से पूर्णतः असंबद्ध है और दिल्ली पुलिस द्वारा लगाए गए किसी भी प्रकार की साजिश या साजिश की बैठकों का हिस्सा नहीं है। इमाम की भूमिका 23 जनवरी 2020 तक बताई गई है और अंतिम कृत्य बिहार में दिया गया एक भाषण था।
दंगों की पृष्ठभूमि
फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़की हिंसा में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। यह हिंसा नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान भड़की थी।
दिल्ली पुलिस ने इन आरोपियों को हिंसा का “मास्टरमाइंड” बताते हुए उनके खिलाफ UAPA और तत्कालीन भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया था।
लंबित मामलों की स्थिति
2022 से चली आ रही प्रक्रिया
इस मामले में कुल 18 आरोपी हैं, जिनमें से 2 फरार हैं। शरजील इमाम, खालिद सैफी और गुलफिशा फातिमा सहित कई आरोपियों की जमानत याचिकाएं 2022 से दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित हैं।
पहले से मिली जमानत
देवांगना कलिता, नताशा नरवाल और आसिफ इकबाल तन्हा को 15 जून 2021 को दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा नियमित जमानत दी गई थी। आरोपी इशरत जहान को ट्रायल कोर्ट द्वारा जमानत मिल गई थी।
आज का यह फैसला इस मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है, जो पिछले पांच वर्षों से न्यायिक प्रक्रिया में है।
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