नई दिल्ली में भारतीय मुस्लिम इतिहास पर आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में शशि थरूर, सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी, मनोज झा और अन्य प्रमुख हस्तियों ने साझा किए विचार
नई दिल्ली,11 अप्रैल 2026: ‘इंडिया हिस्ट्री फोरम’ के तत्वावधान में इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर में दो दिवसीय भव्य सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। इस सम्मेलन का मुख्य विषय “भारत के इतिहास, समाज और सभ्यता के विकास में मुसलमानों की भूमिका” है। कार्यक्रम के पहले दिन लोकसभा सांसद शशि थरूर, जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के अध्यक्ष सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी, राज्यसभा सांसद मनोज कुमार झा, कांग्रेस नेता गुरदीप सिंह सप्पल, पूर्व राज्यसभा सांसद मोहम्मद अदीब, लेखक अशोक कुमार पांडे और इंडिया हिस्ट्री फोरम के संयोजक डॉ. शादाब मूसा सहित कई बुद्धिजीवियों ने शिरकत की।
इतिहास के सही नैरेटिव की आवश्यकता: शशि थरूर सत्र को संबोधित करते हुए सांसद शशि थरूर ने कहा, “हमारे गौरवशाली इतिहास के साथ अक्सर छेड़छाड़ की जाती है और काल्पनिक कहानियों को ऐतिहासिक तथ्य बनाकर पेश करने की कोशिशें होती हैं। वर्तमान परिस्थितियों में इतिहास के सही नैरेटिव (विमर्श) को समझना और उस सच्चाई को समाज तक पहुंचाना अत्यंत अनिवार्य है।”
इतिहास भविष्य के निर्माण का आधार: सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के अध्यक्ष सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने इतिहास की महत्ता पर जोर देते हुए कहा, “इतिहास केवल सूचनाओं का संग्रह नहीं, बल्कि भविष्य के निर्माण का आधार है। भारत का एक बड़ा हिस्सा इस्लाम और मुसलमानों की महान ऐतिहासिक सेवाओं से जुड़ा है। हमारा देश ‘सामूहिक विस्मृति’ (Collective Amnesia) का शिकार न हो, इसके लिए ऐसे सम्मेलनों की भूमिका महत्वपूर्ण है। आज जब इतिहास को एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है, तब न्यायप्रिय नागरिकों का यह कर्तव्य है कि वे सही इतिहास को दुनिया के सामने रखें।”
लोकतंत्र और पहचान की रक्षा पर जोर राज्यसभा सांसद मनोज कुमार झा ने आगाह किया कि इतिहास को बदलने की कोशिशें भारतीय लोकतंत्र के लिए खतरा हैं। उन्होंने इसे राष्ट्रीय संपत्ति बताते हुए इसकी रक्षा का आह्वान किया। वहीं, कांग्रेस नेता गुरदीप सिंह सप्पल ने ऐतिहासिक तथ्यों के साथ हो रही छेड़छाड़ को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। पूर्व सांसद मोहम्मद अदीब ने भावुक होते हुए कहा, “किसी भी सभ्यता को समाप्त करने का सबसे पहला कदम उसका इतिहास बदलना होता है, जिससे पहचान का संकट खड़ा हो सकता है।”
विशेष सत्र और शोध पत्र सम्मेलन के दौरान विभिन्न इतिहासकारों और विशेषज्ञों ने अर्थव्यवस्था, व्यापार, समाजशास्त्र और राजनीति में मुस्लिम योगदान पर शोध पत्र (Research Papers) प्रस्तुत किए। एक विशेष सत्र “मुस्लिम महिलाओं की ऐतिहासिक भूमिका” पर भी आयोजित किया गया, जिसमें महिलाओं के सामाजिक और बौद्धिक योगदान को रेखांकित किया गया।
इस आयोजन में देशभर से आए विद्वानों, शोधार्थियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और युवाओं ने भारी संख्या में भाग लिया। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने संकल्प लिया कि वे तथ्यों पर आधारित इतिहास के माध्यम से समाज में सद्भाव और भविष्य के निर्माण में अपना सक्रिय योगदान देंगे।
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