नई दिल्ली: काँग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व सांसद कुंवर दानिश अली ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार की कार्यशैली पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने न केवल हाल ही में संपन्न हुई ‘AI Impact Summit’ को एक चुनावी इवेंट बताया, बल्कि इसे देश की साख और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाला कदम करार दिया है।
AI समिट को बताया ‘चुनावी रैली’
दानिश अली ने एक वीडियो साझा करते हुए प्रधानमंत्री को “फोटोजीवी” की संज्ञा दी। उन्होंने आरोप लगाया कि जहाँ एक ओर देश की साख अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दांव पर लगी है, वहीं प्रधानमंत्री एक गंभीर तकनीकी सम्मेलन (AI Summit) को भी अपनी निजी ब्रांडिंग और चुनावी रैली में तब्दील कर रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि प्रधानमंत्री की यह “आत्ममुग्धता” देश को किस दिशा में ले जाएगी?
गलगोटिया प्रकरण से जुड़ाव: “पॉलिटिकल प्रोपेगंडा” का आरोप
इस आलोचना को हाल ही में हुए गलगोटिया विश्वविद्यालय विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है। विपक्षी खेमे का मानना है कि जिस तरह से शैक्षणिक संस्थानों (जैसे गलगोटिया) के छात्रों को कथित तौर पर राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों में उतारा गया, वह सरकार की उसी “इवेंट मैनेजमेंट” की राजनीति का हिस्सा है जिसका ज़िक्र दानिश अली ने AI समिट के संदर्भ में किया है।
- शिक्षा बनाम राजनीति: आलोचकों का तर्क है कि जहाँ एक ओर सरकार AI जैसी भविष्य की तकनीक की बात करती है, वहीं दूसरी ओर गलगोटिया जैसे प्रकरणों में छात्रों का इस्तेमाल राजनीतिक ढाल के रूप में किया जाना विरोधाभासी है।
- साख पर संकट: दानिश अली के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर गंभीर चर्चाओं को छोटा दिखाना और घरेलू स्तर पर संस्थानों का राजनीतिकरण करना, दोनों ही भारत की वैश्विक छवि को नुकसान पहुँचा रहे हैं।
दानिश अली का यह बयान सरकार की उस नीति पर सीधा हमला है जहाँ “विकास” के नारों के पीछे “चुनावी नैरेटिव” सेट करने का आरोप लगाया जाता है। गलगोटिया प्रकरण और AI समिट को एक ही कड़ी में देखते हुए, विपक्ष अब सरकार को ‘गंभीर मुद्दों के राजनीतिकरण’ पर घेरने की तैयारी में है।
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