नई दिल्ली, 25 मार्च 2026: सुप्रीम कोर्ट ने वंदे मातरम गाने को अनिवार्य बनाने वाले सरकारी दिशा-निर्देशों पर स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि यह केवल ‘सलाह’ है, बाध्यकारी नहीं। इस पर जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने स्वागत किया और चेतावनी दी कि किसी पर दबाव डालने पर अदालत जाएंगे।
मौलाना मदनी ने कहा, “वंदे मातरम हमारी मूल आस्था ‘तौहीद’ के विरुद्ध है। किसी को धर्म या अंतरात्मा के खिलाफ मजबूर नहीं किया जा सकता। यह संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता संविधान की मूल संरचना है, जिस पर कोई समझौता नहीं।
सुप्रीम कोर्ट ने 28 जनवरी 2026 के दिशा-निर्देशों को ‘एडवाइजरी’ करार दिया, जिसमें कोई दंड का प्रावधान नहीं। मदनी ने कहा, “यदि कहीं छात्र, व्यक्ति या संस्था पर जबरदस्ती हुई, तो जमीयत उलेमा-ए-हिंद कानूनी लड़ाई लड़ेगी।”
उन्होंने सरकार से अपील की कि संविधान की सर्वोच्चता सुनिश्चित करें और भेदभाव रोकें। यह बयान देश में धार्मिक सद्भाव को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
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