पेट्रोल-डीजल और ATF को लेकर सरकार का बड़ा फैसला, जानें क्यों बढ़ा दिया गया यह टैक्स

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Tax Hike On Petrol-Diesel: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल रहा है। इसका सीधा असर अब नीतिगत फैसलों पर भी पड़ने लगा है। सरकार ने गुरुवार को पेट्रोल, डीजल और हवाई ईंधन (ATF) पर लगने वाले टैक्स में बड़ा बदलाव किया है।

डीजल और ATF पर विंडफॉल टैक्स में तगड़ा इजाफा

सरकार ने डीजल और हवाई ईंधन (ATF) के एक्सपोर्ट (निर्यात) पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स (Windfall Tax) में भारी बढ़ोतरी की है। सरकार की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, कच्चे तेल के दामों में आए उछाल को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।

  • डीजल पर टैक्स: सरकार ने डीजल के निर्यात पर लागू टैक्स को 8.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर सीधे 15.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया है।
  • हवाई ईंधन (ATF) पर टैक्स: एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर विंडफॉल टैक्स को बढ़ाकर 14.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है (इसमें 7.5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है)।

टैक्स की ये बढ़ी हुई दरें गुरुवार, 16 जुलाई से लागू हो गई हैं।

पेट्रोल पर मिली राहत

एक तरफ जहां डीजल और ATF पर टैक्स बढ़ाया गया है, वहीं दूसरी तरफ पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में कटौती की गई है। पेट्रोल पर लगने वाले टैक्स को 4 रुपये प्रति लीटर तक कम कर दिया गया है।

गौरतलब है कि इस टैक्स में बदलाव वैश्विक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किया जाता है। इससे पहले जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में थोड़ी शांति थी, तब सरकार ने पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर विंडफॉल टैक्स बढ़ाया था और डीजल-ATF पर इसे कम किया था। लेकिन बदलते हालातों के बीच 16 जुलाई से इसे दोबारा बढ़ा दिया गया है।

आम आदमी की जेब पर क्या होगा असर?

राहत की बात यह है कि पेट्रोल-डीजल पर टैक्स बढ़ोतरी के इस फैसले का घरेलू बाजार में तेल की कीमतों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इसका कारण यह है कि विंडफॉल टैक्स सरकार की ओर से केवल निर्यात (Export) करने वाली कंपनियों या उद्योगों पर लगाया जाने वाला अतिरिक्त टैक्स है।

इसका मुख्य उद्देश्य घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना और निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय कीमतों का अनुचित फायदा उठाने से रोकना है। इसलिए देश के भीतर आम उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ेंगे।

क्या होता है विंडफॉल टैक्स और क्यों लगाया जाता है?

  • क्या है विंडफॉल टैक्स? यह एक विशेष कर (Special Tax) है जो सरकार किसी कंपनी पर तब लगाती है जब उसे किसी बाहरी परिस्थिति के कारण अचानक और अप्रत्याशित रूप से बहुत बड़ा मुनाफा होने लगता है। उदाहरण के लिए, यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अचानक बढ़ जाएं और किसी तेल कंपनी का मुनाफा बिना किसी अतिरिक्त निवेश के 100 करोड़ से बढ़कर 500 करोड़ हो जाए, तो इस अतिरिक्त 400 करोड़ के लाभ को ‘विंडफॉल गेन’ कहा जाता है। सरकार इसी मुनाफे पर टैक्स लगाती है।
  • क्यों लगाया जाता है? सरकार इस टैक्स के जरिए अतिरिक्त राजस्व (Revenue) जुटाती है, ताकि कंपनियों के इस असाधारण मुनाफे का एक हिस्सा जनहित के कार्यों में लगाया जा सके। साथ ही, इससे घरेलू बाजार में जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता और कीमतों को संतुलित रखने में मदद मिलती है।
  • भारत में इसका उपयोग: भारत में यह टैक्स मुख्य रूप से कच्चे तेल के घरेलू उत्पादकों और पेट्रोल, डीजल तथा ATF का निर्यात करने वाली कंपनियों पर लगाया जाता है। सरकार अंतरराष्ट्रीय कीमतों की समीक्षा करने के बाद हर 15 दिनों में इसकी दरों को घटाती या बढ़ाती है।

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