सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज की, दिल्ली दंगों के ‘बड़ी साजिश’ मामले में 5 आरोपी रिहा

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Supreme Court Adjourns Bail Pleas Of Umar Khalid & 3 Others Till September 19
दिल्ली दंगे का मामला: उमर खालिद-शरजील इमाम को जमानत पर राहत नहीं, अगली सुनवाई 19 सितंबर

नई दिल्ली, 5 जनवरी: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली दंगों की कथित बड़ी साजिश से जुड़े मामले में छात्र कार्यकर्ताओं उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि उनके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), 1967 के तहत प्रथम दृष्टया मामला बनता है। हालांकि, शीर्ष अदालत ने इसी केस में शामिल अन्य पांच आरोपियों — गुलफिशा फातिमामीरा हैदरशिफा-उर-रहमानमोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद — को जमानत मंजूर कर दी।

जस्टिस अरविंद कुमार और एनवी अंजारी की पीठ ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि उमर खालिद और शरजील इमाम अपनी जमानत याचिका एक वर्ष बाद या संरक्षित गवाहों की जांच पूरी होने के बाद दोबारा दाखिल कर सकते हैं। कोर्ट ने माना कि जांच एजेंसी की सामग्री से दोनों की “केंद्रीय और निर्णायक भूमिका” तथा “रणनीतिक स्तर पर संलिप्तता” का प्रथम दृष्टया संकेत मिलता है।


अदालत की प्रमुख टिप्पणियां

  • अदालत ने कहा कि UAPA की धारा 43(D)(5) के तहत जमानत पर सीमाएं लागू होती हैं और केवल दीर्घकालिक हिरासत के आधार पर संवैधानिक अस्वीकृति नहीं मानी जा सकती।
  • अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मुकदमे में देरी अपने आप में जमानत का आधार नहीं बन सकती और इसे किसी “ट्रम्प कार्ड” की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
  • यूएपीए की धारा 15 की व्याख्या करते हुए अदालत ने कहा कि आतंकवादी कार्रवाई केवल प्रत्यक्ष हिंसा तक सीमित नहीं — बल्कि उन कार्यों को भी शामिल करती है जो सार्वजनिक सेवाओं में व्यवधान या अर्थव्यवस्था को खतरा पैदा करते हैं।
  • अदालत ने प्रत्येक आरोपी की भूमिका का स्वतंत्र मूल्यांकन करने पर बल दिया और निचली अदालत को ट्रायल प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए।

‘सभी आरोपी समान स्थिति में नहीं’

पीठ ने कहा कि सभी अभियुक्तों की स्थिति समान नहीं है और उनकी भूमिकाएँ अलग-अलग हैं। इसलिए, सभी को एक समान मानना न्यायसंगत नहीं होगा। अदालत ने पाया कि उमर खालिद और शरजील इमाम की भूमिका मामले में अन्य आरोपियों की तुलना में अधिक गंभीर और विशिष्ट है।

जिन पांच आरोपियों को जमानत दी गई है, उन्हें 12 शर्तों के अधीन रखा गया है, और इन शर्तों का उल्लंघन करने पर उनकी रिहाई रद्द की जा सकती है।


पृष्ठभूमि

यह मामला 2020 के फरवरी माह में दिल्ली में हुए दंगों से जुड़ी कथित “बड़ी साजिश” का है। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि इन दंगों की योजना नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के विरोध प्रदर्शनों की आड़ में बनाई गई थी।

इस मामले में कुल 18 आरोपी हैं, जिनमें ताहिर हुसैन, खालिद सैफी, इशरत जहां, आसिफ इकबाल तन्हा, सफूरा जरगर, देवांगना कलिता और नताशा नरवाल जैसे नाम शामिल हैं। इनमें से कई को पहले ही राहत मिल चुकी है।


कानूनी स्थिति और सुनवाई के विवरण

सुप्रीम कोर्ट में दायर स्पेशल लीव पेटिशन (SLP) के जरिए आरोपियों ने दिल्ली हाईकोर्ट के 2 सितंबर 2025 के फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी जमानत याचिकाएं खारिज की गई थीं। इन याचिकाओं पर सुनवाई 10 दिसंबर 2025 को पूरी हुई थी और फैसला आज सुनाया गया।

दिल्ली पुलिस की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू पेश हुए, जबकि याचिकाकर्ताओं का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ताओं कपिल सिब्बलअभिषेक मनु सिंघवीसिद्धार्थ दवेसलमान खुर्शीदसिद्धार्थ अग्रवालसिद्धार्थ लूथरा और गौतम कझांची ने रखा।