तेहरान/वॉशिंगटन: मध्य-पूर्व से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर आ रही है। ईरान के सरकारी मीडिया ने पुष्टि की है कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei) की अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों में शहीद हो गए हैं। इस ऐतिहासिक घटना के बाद ईरान ने देश भर में 40 दिनों के शोक और 7 दिनों के सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की है।
प्रमुख बिंदु: खामेनेई की मृत्यु और ईरान की स्थिति
- शहादत की पुष्टि: ईरानी सरकारी टेलीविजन ने रविवार तड़के खामेनेई के निधन की आधिकारिक घोषणा की।
- सैन्य अभियान: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पुष्टि की है कि अमेरिका और इजरायल ने मिलकर 1989 से सत्ता में काबिज ईरानी नेता को निशाना बनाया।
- बड़ी क्षति: हमलों में खामेनेई के साथ रक्षा मंत्री अमीर नासिरजादेह, IRGC कमांडर मोहम्मद पाकपुर और सलाहकार अली शमखानी सहित कई शीर्ष सैन्य अधिकारी मारे गए हैं।
- पारिवारिक शोक: रिपोर्टों के अनुसार, इस हमले में खामेनेई की बेटी, पोता, दामाद और बहू की भी जान चली गई है।
डोनाल्ड ट्रम्प और नेतन्याहू का बड़ा बयान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि खुफिया तंत्र लगातार खामेनेई के ठिकाने पर नजर रख रहे थे। ट्रम्प ने इसे अपनी विदेश नीति का सबसे बड़ा कदम बताते हुए कहा, “यह हमला ईरान के दशकों पुराने खतरे को खत्म करने और परमाणु हथियारों के विकास को रोकने के लिए किया गया था।”
वहीं, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पुष्टि की है कि तेहरान स्थित खामेनेई का मुख्य परिसर पूरी तरह नष्ट कर दिया गया है। उन्होंने साफ किया कि शांति स्थापना के उद्देश्य से यह सैन्य कार्रवाई तब तक जारी रहेगी जब तक आवश्यक होगा।
ईरान का पलटवार: 7 देशों पर दागीं मिसाइलें
ईरान ने इन हमलों को ‘अवैध और बिना उकसावे की कार्रवाई’ करार दिया है। जवाब में ईरान ने इजरायल सहित कम से कम सात अन्य देशों पर मिसाइलें दागी हैं। इनमें वे खाड़ी देश भी शामिल हैं जहाँ अमेरिकी सैन्य अड्डे स्थित हैं।
ईरानी मीडिया के एक प्रवक्ता ने भावुक संदेश में कहा:
“सर्वोच्च नेता की शहादत के बाद उनका मिशन खत्म नहीं होगा, बल्कि इसे और अधिक जोश और उत्साह के साथ आगे बढ़ाया जाएगा।”
वैश्विक प्रभाव और विश्लेषण
अयातुल्ला अली खामेनेई 1989 में अयातुल्ला खुमैनी के बाद सत्ता में आए थे। उनकी मृत्यु के बाद ईरान में सत्ता के उत्तराधिकार को लेकर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। जानकारों का मानना है कि इस घटना से वैश्विक तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर गहरा असर पड़ेगा।
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