नई दिल्ली: लोकसभा में शुक्रवार को महिला आरक्षण से जुड़ा ‘संविधान (131वां संशोधन) विधेयक’ आवश्यक बहुमत न मिलने के कारण पारित नहीं हो सका। सदन में मतदान के दौरान सरकार दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा पार करने में विफल रही, जिसके परिणामस्वरूप विधेयक गिर गया। इस विधायी घटनाक्रम को विपक्ष अपनी बड़ी जीत और संघीय ढांचे की रक्षा के रूप में देख रहा है।
मुख्य बिंदु: सदन का गणित और तकनीकी पेच
संविधान संशोधन के लिए अनिवार्य विशेष बहुमत की आवश्यकता को सरकार पूरा नहीं कर पाई। मतदान का विवरण निम्नलिखित है:
- पक्ष में वोट: 298
- विरोध में वोट: 230
- परिणाम: दो-तिहाई बहुमत न होने के कारण विधेयक अस्वीकृत।
विधेयक के गिरने के साथ ही इससे जुड़े दो अन्य संबंधित बिल—‘परिसीमन विधेयक, 2026’ और ‘संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026’—को भी आगे नहीं बढ़ाया जा सका। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने स्पष्ट किया कि मुख्य संविधान संशोधन विधेयक के विफल होने के बाद शेष विधेयकों को विचारार्थ रखना संभव नहीं है।
विपक्ष का रुख: “संविधान पर आक्रमण को नाकाम किया”
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सरकार के इस कदम को राजनीतिक ढांचे में हेरफेर करने की कोशिश करार दिया। उन्होंने कहा:
“यह बिल महिला आरक्षण के नाम पर हिंदुस्तान के राजनीतिक और चुनावी ढांचे को बदलने का प्रयास था। यह संविधान पर सीधा आक्रमण था, जिसे विपक्ष ने एकजुट होकर नाकाम कर दिया है।”
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को चुनौती देते हुए कहा कि यदि सरकार वास्तव में महिला आरक्षण लागू करना चाहती है, तो वह 2023 में पारित कानून को बिना किसी शर्त (परिसीमन) के तुरंत लागू करे, जिसमें विपक्ष पूर्ण सहयोग देगा।
“संघवाद की जीत”: कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों का प्रहार
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इसे “लोकतांत्रिक व्यवस्था और संघीय ढांचे की जीत” बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण की आड़ में ‘कुटिल परिसीमन प्रस्ताव’ थोपना चाहती थी।
वहीं, दक्षिण भारत से भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने इसे राज्य के हितों की जीत बताते हुए कहा कि “तमिलनाडु ने दिल्ली के अहंकार को हरा दिया है।” कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने भी निशाना साधते हुए कहा कि महिला आरक्षण को जनगणना और परिसीमन से जोड़ना सरकार की नीयत पर सवाल खड़े करता है।
विपक्ष की मांग अब स्पष्ट है: ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ को बिना किसी देरी के 2029 के चुनावों से ही लागू किया जाए। वर्तमान राजनीतिक गतिरोध के बाद अब गेंद केंद्र सरकार के पाले में है कि वह आरक्षण को परिसीमन से अलग कर लागू करने की दिशा में क्या कदम उठाती है।
- डिजिटल मीडिया पर प्रतिबंध: कोगिटो मीडिया फाउंडेशन का सुप्रीम कोर्ट जाने का ऐलान, पत्रकारों से विवरण साझा करने की अपील

- “भाजपा भारत नहीं है…”: एंटी-CEC प्रदर्शनों के समर्थन में उतरीं अभिनेत्री पूजा बेदी, लोकतंत्र की रक्षा के लिए नागरिकों से की अपील

- नेहा सिंह राठौर vs ABP न्यूज: “कॉल गर्ल बताकर खबर चलाई, अब माफी माँगी… नेहा सिंह राठौर बोलीं- कोर्ट में मिलो, न्याय चाहिए”

- महाराष्ट्र के धर्मांतरण कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, एपीसीआर ने मांगी संवैधानिक समीक्षा

- वोट चोरी के खिलाफ विपक्ष एकजुट, राहुल बोले—लोकतंत्र की बहाली के लिए जारी रहेगा संघर्ष, दोषियों को मिलेगी सजा

- ‘इंडिया’ गठबंधन के प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति से की मुलाकात, ‘वोट चोरी’ का मुद्दा उठाकर सौंपे सबूत और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की

- वरिष्ठ पत्रकार रज़ा रिज़वी पुनः प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य नियुक्त, मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने दी बधाई

- ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर बिफरा ‘INDIA’ गठबंधन: पटना से हैदराबाद तक सड़क पर विपक्ष, चुनाव आयोग पर तीखा हमला

