नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम: केरल की राजनीति में एक बड़े बदलाव का आगाज़ हो गया है। कांग्रेस आलाकमान ने लंबी मंत्रणा के बाद वरिष्ठ नेता वीडी सतीशन के नाम पर मुहर लगा दी है, जो अब केरल के अगले मुख्यमंत्री के रूप में कमान संभालेंगे।
आलाकमान का फैसला और घोषणा
दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में पार्टी के पर्यवेक्षक अजय माकन, मुकुल वासनिक और केरल प्रभारी दीपा दासमुंशी ने आधिकारिक तौर पर सतीशन के नाम की घोषणा की।
- चयन प्रक्रिया: 7 मई 2026 को तिरुवनंतपुरम में हुई विधायक दल की बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर नेता चयन का अधिकार कांग्रेस अध्यक्ष को सौंपा गया था।
- व्यापक परामर्श: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी, एआईसीसी पर्यवेक्षकों और राज्य के सांसदों व पूर्व पीसीसी अध्यक्षों से विस्तृत चर्चा के बाद यह निर्णय लिया।
- प्रमुख दावेदार: सतीशन ने मुख्यमंत्री पद की दौड़ में संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला जैसे दिग्गजों को पीछे छोड़ते हुए यह उपलब्धि हासिल की।
वकील से मुख्यमंत्री तक का सफर
कोच्चि में जन्मे सतीशन इस महीने के अंत में 62 वर्ष के हो जाएंगे। उनका राजनीतिक सफर बेहद प्रभावशाली रहा है:
- राजनीतिक पदार्पण: पेशे से वकील सतीशन ने 2001 में परावुर सीट से विधानसभा चुनाव जीतकर सक्रिय राजनीति में कदम रखा।
- विपक्ष के नेता के रूप में प्रहार: 2021 में यूडीएफ की हार के बाद उन्हें विपक्ष का नेता बनाया गया। उन्होंने सोने की तस्करी, एआई कैमरा विवाद और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर विजयन सरकार को जमकर घेरा।
- वाक्पटुता और साख: सतीशन अपनी गुटबाजी रहित राजनीति, सटीक आंकड़ों और तीखे व्यंग्य के लिए जाने जाते हैं, जिससे वे वामपंथी दलों के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हुए।
नई पीढ़ी को कमान
सतीशन का चयन कांग्रेस की उस रणनीति को दर्शाता है जिसमें पार्टी राज्य की जिम्मेदारी एक युवा, सक्रिय और मीडिया-फ्रेंडली नेतृत्व को सौंपना चाहती है। हालिया विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ ने 140 में से 102 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की है।
“सतीशन ने अपनी पहचान गुटबाज़ी से नहीं, बल्कि विधानसभा में अपने शानदार प्रदर्शन और संगठन के प्रति अटूट निष्ठा से बनाई है।”
गुरुवार सुबह सतीशन अपने परिवार के साथ तिरुवनंतपुरम पहुंचे। अब जब वे विपक्ष की बेंचों से हटकर सत्ता के केंद्र में बैठेंगे, तो उनके कंधों पर पिनाराई विजयन की राजनीतिक विरासत का मुकाबला करने और जनता की बड़ी उम्मीदों को पूरा करने का दारोमदार होगा।
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