शामली धर्मांतरण विवाद: “अल्हम्दुलिल्लाह, मैं मुसलमान हूँ, किसी ने दबाव नहीं डाला”— आयुष मलिक का बड़ा बयान

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शामली (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के शामली से सामने आया एक अंतरधार्मिक विवाह और धर्मांतरण का मामला अब कानूनी और पारिवारिक विवाद के बीच व्यक्तिगत आस्था की बहस में बदल गया है। 30 वर्षीय आयुष मलिक ने सार्वजनिक रूप से सामने आकर अपनी मर्जी से इस्लाम अपनाने का दावा किया है। उन्होंने अपनी पत्नी और ससुर पर लगे ‘धोखे और संपत्ति हड़पने’ के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।

मीडिया के कैमरों के सामने आयुष ने साफ शब्दों में कहा:

“मुझे किसी ने मजबूर नहीं किया और न ही कोई धोखा दिया। मैं बचपन से इस्लाम को समझता था और यह फैसला पूरी तरह मेरा है। अब मैं मुसलमान हूँ, अल्हम्दुलिल्लाह।”

हाई-प्रोफाइल बिजनेसमैन पिता ने दर्ज कराई थी FIR, बहू और ससुर जेल में

यह पूरा विवाद तब सुर्खियों में आया जब शामली के एक नामचीन मेडिकल व्यवसायी देवराज मलिक (आयुष के पिता) ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

  • आरोप: पिता का आरोप है कि जिम ट्रेनर चांदनी कुरैशी और उनके पिता इस्लाम कुरैशी ने उनकी करोड़ों की पारिवारिक संपत्ति हड़पने के लिए आयुष को हनीट्रैप में फंसाया और उसका धर्म परिवर्तन कराया।
  • पुलिस एक्शन: पिता की तहरीर पर कार्रवाई करते हुए शामली पुलिस ने चांदनी और उसके पिता को गिरफ्तार कर लिया, जो फिलहाल न्यायिक हिरासत (जेल) में हैं।

डॉ. इसरार अहमद के वीडियो और आयुष का बदलाव: पुलिस का दावा

शामली के पुलिस अधीक्षक (SP) एन.पी. सिंह के मुताबिक, देवराज मलिक का एक संपन्न परिवार है, जिसमें तीन बेटियां और एक बेटा (आयुष) है।

पुलिस जांच और पारिवारिक दावों के अनुसार, आयुष पिछले कुछ समय से परिवार से कट गया था। उसने लंबी दाढ़ी रख ली थी और पहनावा भी बदल लिया था। पुलिस ने बताया कि आयुष दिवंगत पाकिस्तानी इस्लामिक विद्वान डॉ. इसरार अहमद के यूट्यूब वीडियो और कुरान की व्याख्याओं से काफी प्रभावित था, जिसने दक्षिण एशिया के कई युवाओं को प्रभावित किया है।

“मुझे पिता की संपत्ति नहीं चाहिए, मां-बहनों में बांट दें” — आयुष की दो टूक

अचानक कट्टरपंथी बनने और संपत्ति के लालच के आरोपों पर आयुष ने बेहद तार्किक जवाब दिया। उन्होंने कहा कि उनका यह बदलाव रातों-रात नहीं हुआ, बल्कि सालों के अध्ययन का नतीजा है।

  • अध्ययन का नतीजा: “यह ऐसा नहीं है कि एक सुबह उठकर मुझे ज्ञान मिल गया। मैं डॉ. इसरार को सुनता हूँ क्योंकि मुझे उनकी बातें तार्किक लगती हैं, किसी ने दबाव नहीं डाला।”
  • संपत्ति का त्याग: आयुष ने खुलासा किया कि उन्होंने फरवरी में ही परिवार को अपने निकाह की जानकारी दे दी थी। उन्होंने कहा, “मैंने अपने पिता से साफ कह दिया है कि मुझे उनकी संपत्ति का एक रुपया नहीं चाहिए। वह जायदाद मेरी मां और बहनों में बांट दी जाए।”

पारिवारिक प्रेम और ‘बाहरी दबाव’ का एंगल

तनाव के बावजूद आयुष ने अपने माता-पिता के प्रति सम्मान जताया। उन्होंने अंदेशा जताया कि उनके पिता यह सब अपनी मर्जी से नहीं कर रहे, बल्कि उन पर कुछ बाहरी या दक्षिणपंथी संगठनों का भारी दबाव है।

आयुष ने भावुक होते हुए कहा, “वे आज भी मेरा परिवार हैं। मैं अपनी पत्नी और अपने माता-पिता, दोनों से प्यार करता हूँ। मैं किसी एक को चुनने के लिए दूसरे को नहीं छोड़ सकता।”

यह मामला केवल एक कानूनी विवाद नहीं है, बल्कि यह आधुनिक भारत में व्यक्तिगत स्वतंत्रता, धार्मिक स्वायत्तता, पारिवारिक अपेक्षाओं और अंतरधार्मिक शादियों के बीच पैदा होने वाली सामाजिक और कानूनी जटिलताओं का एक बड़ा उदाहरण है।

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