नई दिल्ली: IRCTC घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के लिए फिलहाल राहत की स्थिति बनी हुई है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार को इस मामले में आरोप तय करने यानी फ्रेमिंग ऑफ चार्जेज पर अपना फैसला टाल दिया। अदालत अब 14 अगस्त को इस पर अपना आदेश सुनाएगी।
यह मामला पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के कार्यकाल से जुड़ा है, जब रेल मंत्रालय के तहत IRCTC के होटल टेंडरों में कथित अनियमितताओं के आरोप लगे थे। जांच एजेंसियों का कहना है कि रेलवे होटल प्रबंधन से जुड़े ठेकों के बदले जमीन से जुड़े सौदों में लालू परिवार और उनसे जुड़े लोगों को कथित रूप से फायदा पहुंचाया गया। इसी आधार पर प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच आगे बढ़ाई थी।
इस केस में लालू प्रसाद यादव के अलावा उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव सहित परिवार के कई सदस्य आरोपी हैं। अदालत में आरोप तय करने को लेकर सुनवाई चल रही थी, लेकिन विशेष अदालत ने अभी इस पर अंतिम निर्णय नहीं दिया। फिलहाल फैसले के टलने से लालू परिवार को अस्थायी राहत मिली है, हालांकि मामला पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
अदालत का 14 अगस्त का फैसला इस केस की दिशा तय करने में अहम माना जा रहा है। अगर अदालत आरोप तय करती है, तो मामला ट्रायल की ओर बढ़ेगा। दूसरी ओर, यदि आरोप तय नहीं होते हैं, तो आरोपियों को कानूनी तौर पर बड़ी राहत मिल सकती है।
IRCTC घोटाले को बिहार और राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से भी बेहद संवेदनशील मामला माना जाता है, क्योंकि इसमें एक तरफ पूर्व रेल मंत्री के रूप में लालू प्रसाद यादव का कार्यकाल जुड़ा है और दूसरी तरफ उनके परिवार के कई सदस्य जांच के दायरे में हैं। यही वजह है कि इस केस पर राजनीतिक हलकों और मीडिया की लगातार नजर बनी हुई है।
यह मामला लंबे समय से चर्चा में है और अदालत की अगली सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी। 14 अगस्त को आने वाला फैसला यह तय करेगा कि इस बहुचर्चित मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में जाएगी।
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