भ्रमित मुस्लिम जनसंख्या तीव्र वृद्धि और उस पर डिबेट करा कर भारतीय न्यूज़ चैनल मुसलमानों के खिलाफ देश में नफरत का माहौल तैयार कर रहे हैँ ताकि इस नफरत का फायदा चुनाव में राजनीतिक पार्टियों को पहुंचाया जा सके।
किसी भी मुल्क की जनसंख्या देश के लिए महत्वपूर्ण संसाधन होती है, जिसे शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर के इसे देश के विकास के लिए तैयार किया जाता है। ऐसा करना सरकार का दायित्व है।
मैं पूरी तरह से सरकार केभ्रामक आंकड़ों को सिरे से ख़ारिज करता हूँ जो चुनाव के तीसरे चरण के मतदान के बाद अचानक टीवी चैनल पर ज़हरीली डिबेट का विषय बन गए हैं।
जबकि हक़ीक़त यह है कि 2021 की जनगणना और उसकी रिपोर्ट 4 साल गुज़र जाने के बाद अभी भी पेश नहीं हुई है और ना ही अभी कोई उम्मीद है।

अगर सरकार के इन आंकड़ों को सत्य मान भी लिया जाय तो ऐसा लगता है सरकार सारे मुख्य काम रोजगार अर्जन, भूखमरी उन्मूलन जैसे कार्यों को छोड़ कर मुस्लिम आबादी के आंकड़े इकट्ठे करने में लगी हुई थी।
जनसंख्या जनगणना स्थानीय, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर मानव संसाधन, जनसांख्यिकी, संस्कृति और आर्थिक संरचना की स्थिति के बारे में बुनियादी आँकड़े प्रदान करती है। यह सारी जानकारी राष्ट्र के भविष्य की दिशा तय करने और उसे आकार देने के लिए महत्वपूर्ण है। किंतु जिस प्रकार टीवी पर डिबेट रणनीतिक रूप से चलाए जा रहे हैँ उनसे किसी समस्या का समाधान तो मुमकिन नहीं है किंतु एक वर्ग विशेष के खिलाफ मात्र चुनाव प्रभावित करने के लिए ज़हर बांटा जा रहा है।
मैं सरकार और विशेषकर बुद्धिजीवी वर्ग से इस प्रकार के नफरत फ़ैलाने वाले डिबेट और टीवी चैनल पर सख्त कार्रवाई की मांग करता हुं।
जय हिन्द!
(नोट- उपरोक्त दिए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. ये जरूरी नहीं कि ग्लोबलटुडे इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है)
- हमने एक नगीना और खो दिया: सुरों की सादगी का वो ‘सुमन’ जो हमेशा महकता रहेगा- सिबतैन शाहिदी

- शिक्षित परिवारों में दहेज मृत्यु और दहेज की बढ़ती मांग: कारण, जड़ें और समाधान- डॉ. शालिनी अली

- NEET Paper Leak: प्रश्नपत्र नहीं, देश के लाखों युवाओं का भविष्य लीक हो रहा है! -सैय्यद मोहम्मद काज़िम

- 16 और 17 अप्रैल 2026: जब संसद में महिला आरक्षण बिल फिर गिरा, और कांग्रेस, सपा, डीएमके व INDIA गठबंधन जिम्मेदार बने

- नारी शक्ति से नव भारत तक: महिलाओं को आगे बढ़ाना विकसित भारत 2047 के लिए अनिवार्य

- तुझे किताब से मुमकिन नहीं फ़राग़… क्या हम वाकई ‘साहिब-ए-किताब’ हैं? – यावर रहमान

