भोपाल: APCR राज्य सम्मेलन में गूँजी न्याय की आवाज़, नफरत और अन्याय के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान

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भोपाल, 17 मई 2026: एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स (APCR) की मध्य प्रदेश इकाई द्वारा राजधानी भोपाल में एक भव्य राज्य सम्मेलन का सफल आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में देश और प्रदेश की जानी-मानी हस्तियों सहित वकीलों, शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, धार्मिक विद्वानों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन का मुख्य एजेंडा समाज में बढ़ती नफरत, भेदभाव, तानाशाही प्रवृत्तियों और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा पर चर्चा करना था।

⚖️ अदालतों के साथ-साथ सामाजिक स्तर पर भी लड़नी होगी न्याय की लड़ाई: प्रशांत भूषण

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने के लिए सिर्फ अदालती लड़ाइयाँ काफी नहीं हैं, बल्कि इसके लिए जनता की सक्रिय भागीदारी भी बेहद ज़रूरी है।

वहीं, प्रसिद्ध शिक्षाविद और लेखक प्रोफेसर अपूर्वानंद झा ने समाज में बढ़ते सांप्रदायिक ध्रुवीकरण पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा:

“न्याय की लड़ाई केवल अदालतों की चारदीवारी तक सीमित नहीं है, इसे हमें समाज के भीतर भी उतना ही मजबूत करना होगा।”

📌 हाशिए के समुदायों पर बढ़ता अन्याय और कानून का दुरुपयोग

पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) वज़ीर अहमद अंसारी ने मध्य प्रदेश में अल्पसंख्यकों और अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST) समुदायों की वर्तमान स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने विशेष रूप से निम्नलिखित मुद्दों को रेखांकित किया:

  • भोपाल में हाई कोर्ट बेंच की कमी।
  • मांस परिवहन के नाम पर हो रही कार्रवाई।
  • धर्मांतरण विरोधी कानूनों का कथित दुरुपयोग।

आईएमसीआर (IMCR) के चेयरमैन और पूर्व सांसद मोहम्मद अदीब तथा एपीसीआर के महासचिव मलिक मोतसिम खान ने भी सरकारों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की रक्षा के लिए सभी विपक्षी और जनवादी ताकतों को एकजुट होना होगा।

🤝 ‘धर्म और जाति से ऊपर उठकर काम कर रहा है APCR’

सम्मेलन में प्रदेश के विभिन्न जिलों जैसे नीमच, इंदौर, खंडवा और खरगोन से आए प्रतिनिधियों ने कानूनी संघर्षों के अपने अनुभव साझा किए।

  • खंडवा के काज़ी अशफाक अली ने ‘टिटगांव मामले’ का विशेष जिक्र किया, जहाँ एपीसीआर के कानूनी हस्तक्षेप के कारण प्रशासन द्वारा भूमि और मकान हटाने की कार्रवाई से पीड़ितों को बड़ी राहत मिली।
  • वक्ताओं ने इस बात की सराहना की कि एपीसीआर बिना किसी धार्मिक या जातीय भेदभाव के हर पीड़ित की मदद कर रहा है।

एपीसीआर के राष्ट्रीय सचिव नदीम खान ने संगठन की राष्ट्रीय रिपोर्ट पेश करते हुए आश्वस्त किया कि दूर-दराज के गाँवों में अन्याय का शिकार हो रहे लोग खुद को अकेला न समझें, पूरा संगठन उनके साथ खड़ा है।

📜 सांस्कृतिक शुरुआत और सम्मान समारोह

कार्यक्रम की शुरुआत स्थानीय युवा वकीलों और कवियों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ हुई। इसके बाद जावेद अख्तर ने स्वागत भाषण दिया और अधिवक्ता फव्वाज शाहीन ने मंच का संचालन किया। आयोजन को सफल बनाने में ज़ैद पठान, डॉ. फ़ज़ल, अनवर पठान और एडवोकेट ज़ुबैर इलाही की टीम ने मुख्य भूमिका निभाई।

समारोह में काज़ी-ए-शहर भोपाल मुफ्ती मुश्ताक नदवी, उप क़ाज़ी-ए-शहर मुफ्ती अल क़दर, वामपंथी नेता शैलेंद्र कुमार शैली और एडवोकेट अशरफ अली ने भी अपने विचार रखे। वरिष्ठ अधिवक्ता रेखा श्रीवास्तव ने संगठन को अपना पूरा समर्थन देने का ऐलान किया।

टीमों का सम्मान: सम्मेलन के समापन पर एक विशेष सम्मान समारोह आयोजित किया गया, जिसमें मध्य प्रदेश में जमीनी स्तर पर कानूनी सहायता, फैक्ट फाइंडिंग और हेट क्राइम के खिलाफ बेहतरीन कार्य करने वाली एपीसीआर की जिला टीमों को सम्मानित किया गया।

APCR के बारे में: वर्ष 2006 में स्थापित यह संगठन एक राष्ट्रीय नागरिक अधिकार मंच है, जिसमें सेवानिवृत्त न्यायाधीश, वकील, पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं, जो पीड़ितों को मुफ्त कानूनी सहायता और न्याय दिलाने का कार्य करते हैं।

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