मुंबई:: हाल ही में वक्फ संशोधन बिल पर चर्चा के लिए जामिया मिल्लिया इस्लामिया के पूर्व छात्र नेता और पसमांदा समाज के रहबर, इरफान जामियावाला को 29 सांसदों के साथ आमंत्रित किया गया। इस चर्चा में भाग लेने वाले प्रतिनिधियों ने वक्फ संपत्तियों के बेहतर उपयोग और वक्फ माफिया से छुटकारा पाने की संभावनाओं पर खुलकर विचार रखे।
ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज, एक राष्ट्रवादी सामाजिक संगठन, जो शिक्षा और नेतृत्व की कमी के कारण विकास में पिछड़े पसमांदा समुदाय के लिए काम करता है, ने इस बिल का समर्थन किया है। इस संगठन का प्रतिनिधित्व मुख्य रूप से किसानों, मजदूरों, हस्तशिल्पियों, बुनकरों और छोटे किसानों द्वारा किया जाता है, जो विकास की मुख्यधारा से अछूते रहे हैं।
इस चर्चा में मौजूद 22 सांसदों में प्रमुख रूप से जगदम्पिका पाल, असदउद्दीन ओवैसी, गौरव गोगोई, अरविंद सावंत, मौलाना मोहिबुल्ला, मोहम्मद जावेद, ए. राजा, कल्याण बनर्जी और दिलीप साइकिया ने संयुक्त संसदीय समिति के समक्ष अपने सुझाव और आपत्तियां प्रस्तुत कीं। इरफान जामियावाला ने वक्फ संपत्तियों के सदुपयोग और उनके सही प्रबंधन पर जोर देते हुए बिल के पारित होने की आवश्यकता पर बल दिया।
इरफान जामियावाला के नेतृत्व में महाज ने कहा कि यह बिल पसमांदा मुस्लिम समाज के लिए एक ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता है, क्योंकि इससे पहले किसी भी सरकार ने वंचित और शोषित समाज के हितों को लेकर इतनी गंभीरता से विचार नहीं किया था। उनका मानना है कि इस बिल के जरिए पसमांदा समाज को वक्फ संपत्तियों का फायदा मिल सकेगा और उनका सही उपयोग हो सकेगा।
महाज के प्रतिनिधि मंडल ने यह भी स्पष्ट किया कि वह पसमांदा मुस्लिम समाज के सुधार और विकास के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के साथ लगातार बातचीत जारी रखेगा। संगठन ने सभी संगठनों को आह्वान किया है कि वे एकजुट होकर समाज के हित में कार्य करें और पसमांदा समुदाय को मुख्यधारा में शामिल करने के प्रयासों को गति दें।
महाज का उद्देश्य है कि पसमांदा मुस्लिम समाज को जागरूक करके उन्हें उनके अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित किया जाए, ताकि उनका समग्र विकास सुनिश्चित हो सके।
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