बड़ी खबर: रामपुर जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों के ध्वस्तीकरण मामले पर टली सुनवाई, अब 13 अगस्त पर नजरें

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मुरदाबद: मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के अस्तित्व पर मंडरा रहे सबसे बड़े संकट से जुड़ी कानून की लड़ाई एक बार फिर आगे खिसक गई है। यूनिवर्सिटी के 38 अवैध भवनों को ध्वस्त करने के रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सोमवार को आरडीए अध्यक्ष एवं मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह की कोर्ट में सुनवाई टल गई। कांवड़ यात्रा के चलते हुए रूट डायवर्जन के कारण अधिवक्ताओं द्वारा दिए गए कार्यस्थगन प्रस्ताव के बाद अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 13 अगस्त की तारीख मुकर्रर की है।

मामले की पूरी क्रोनोलॉजी और कानूनी पेंच

  • 15 जुलाई का कड़ा आदेश: RDA के उपाध्यक्ष/डीएम(रामपुर) अजय कुमार द्विवेदी ने जौहर यूनिवर्सिटी के कुल 40 में से 38 भवनों को पूरी तरह अवैध मानते हुए ध्वस्तीकरण (Demolition) का आदेश जारी किया था।
  • मंडलायुक्त कोर्ट में चुनौती: यूनिवर्सिटी प्रबंधन और ट्रस्ट ने इस बुलडोजर आदेश के खिलाफ मंडलायुक्त की अदालत का दरवाजा खटखटाया है, जिसके अंगीकरण (Admissibility) पर सोमवार को सुनवाई होनी थी।

यूनिवर्सिटी ट्रस्ट का बड़ा दावा: 2012 से पहले बने निर्माण पर RDA का अधिकार ही नहीं

सुनवाई टलने के बीच ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी के अधिवक्ता मोहम्मद जुनैद एजाज ने अपना कानूनी पक्ष मजबूती से सामने रखा है:

  • गूगल अर्थ और PWD की जांच का हवाला: आयुक्त न्यायालय द्वारा 2012 से पहले बने भवनों का ब्योरा मांगने पर यूनिवर्सिटी ने अपना जवाब दाखिल कर दिया है। ट्रस्ट का दावा है कि पूर्व में लेबर सेल की कार्रवाई के दौरान PWD के अधिशासी अभियंता ने गूगल अर्थ एप्लीकेशन के जरिए पुष्टि की थी कि 2009 से पहले ही 14 भवन बन चुके थे।
  • सरकारी रिकॉर्ड तलब करने की मांग: यूनिवर्सिटी ने स्पष्ट किया कि भवनों का बाकी रिकॉर्ड शासन, PWD और श्रम विभाग के पास सुरक्षित है, जिसे वहीं से तलब किया जाए। इसके साथ ही वर्ष 2009 से 2012 और 2012 के बाद के निर्माण का ब्योरा जमा करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया है।
  • कानूनी अधिकार क्षेत्र पर सवाल: अधिवक्ता ने बड़ा पेंच फंसाते हुए कहा कि RDA ने 7 जनवरी 2012 को जिला पंचायत द्वारा लागू नियमावली के उल्लंघन का आधार बनाया है। ऐसे में जो निर्माण 7 जनवरी 2012 से पहले के हैं, उन पर कानूनी रूप से RDA को कार्रवाई करने का कोई अधिकार ही नहीं है।

अब 13 अगस्त को होने वाली सुनवाई बेहद निर्णायक मानी जा रही है, जिस पर न सिर्फ रामपुर बल्कि पूरे प्रदेश की राजनीतिक और कानूनी नजरें टिकी हुई हैं।

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