राहुल गांधी के धरने के आगे झुकी दिल्ली पुलिस: जंतर-मंतर पर पैलेट गन से घायल साहिल लोचब मामले में 31 दिन बाद FIR दर्ज

0
rahul-gandhi-dharna-pellet-gun-fir
राहुल गांधी के धरने के आगे झुकी दिल्ली पुलिस: जंतर-मंतर पर पैलेट गन से घायल साहिल लोचब मामले में 31 दिन बाद FIR दर्ज

नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन से घायल हुए युवक साहिल लोचब के मामले में दिल्ली पुलिस ने आखिरकार एफआईआर दर्ज कर ली है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के संसद मार्ग थाना (डीसीपी ऑफिस) परिसर में करीब 7 घंटे तक चले शांतिपूर्ण धरने के बाद पुलिस ने यह कार्रवाई की।

घटना के 31 दिन बाद पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में अज्ञात के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 118 और 125 के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने एफआईआर की कॉपी राहुल गांधी को सौंप दी है।

न्याय की दिशा में पहला कदम: राहुल गांधी

एफआईआर दर्ज होने के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि यह न्याय की दिशा में पहला कदम है।

“उसे गोली लगे हुए एक महीना हो चुका है। साहिल के शरीर में अभी भी छर्रे (पेलेट्स) फंसे हुए हैं—तीन उसकी आंख में हैं, जिससे वह देख नहीं पा रहा है, और तीन-चार छर्रे उसके दिल के पास हैं। इस नौजवान के साथ बहुत बड़ा अन्याय हुआ है।” — राहुल गांधी

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि स्थानीय पुलिस अधिकारी एफआईआर दर्ज करना चाहते थे, लेकिन आदेश ऊपर से रोका जा रहा था। उन्होंने कहा कि अंतिम स्वीकृति गृह सचिव और गृह मंत्री अमित शाह के स्तर से आने के बाद ही एफआईआर जारी हो सकी।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि युवक के शरीर में छर्रे होने के बावजूद सरकार दोषियों पर कार्रवाई करने से बच रही थी, जिसके कारण नेताओं को धरने पर बैठना पड़ा।

बीजेपी का पलटवार: ‘ओछी और अराजक राजनीति’

दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने राहुल गांधी के इस कदम की तीखी आलोचना की है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि संसद मार्ग थाने के बाहर धरना देना कांग्रेस की राजनीतिक हताशा और “फुटेज पाने की भूख” को दर्शाता है।

नड्डा ने आरोप लगाया कि यह विरोध प्रदर्शन न्याय या छात्रों के लिए नहीं, बल्कि ‘वंदे मातरम्’ के मुद्दे पर कांग्रेस के रुख से जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश है।