कंफर्ट ज़ोन छोड़ें और कानून के दायरे में खोजें सेवा का अवसर: मुरादाबाद मंडलायुक्त आञ्जनेय कुमार सिंह

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मुरादाबाद: प्रशासनिक अधिकारियों के लिए नियम-कानून केवल बंदिशें नहीं हैं, बल्कि उनके भीतर रहकर भी जनता के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का एक बड़ा अवसर छिपे होने का जरिया हैं। यह बात मुरादाबाद के मंडलायुक्त (Divisional Commissioner) आञ्जनेय कुमार सिंह ने युट्यूब टॉक शो (The Supreet Singh Show) में दिए एक खास पॉडकास्ट साक्षात्कार में कही।

उन्होंने साक्षात्कार में मुरादाबाद मंडल की पौराणिक एवं ऐतिहासिक धरोहर को रेखांकित किया, साथ ही अधिकारियों और समाज के लिए एक स्पष्ट व प्रेरणादायक संदेश दिया।

‘चौपला’ से मुरादाबाद तक का सफर: अतीत और भविष्य का अद्भुत सेतु

मुरादाबाद के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए मंडलायुक्त ने बताया कि इस शहर की बसावट बहुत पुरानी नहीं है। शुरुआती दिनों में यह स्थान ‘चौपला’ या ‘चौपाला’ के नाम से जाना जाता था, जो चार गांवों को मिलाकर बना था। बाद में यह रामपुर का हिस्सा रहा और आगे चलकर मुरादाबाद के रूप में विकसित हुआ।

उन्होंने मुरादाबाद मंडल को “अतीत और भविष्य को जोड़ने वाला सेतु” करार दिया। उन्होंने कहा:

  • बिजनौर: महाभारत कालीन हस्तिनापुर का हिस्सा रहा है, जहाँ ऐतिहासिक विदुर कुटी स्थित है।
  • संभल: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भविष्य में भगवान कल्कि के अवतार की भूमि माना जाता है।
  • कनेक्टिविटी: दिल्ली और लखनऊ दोनों प्रमुख केंद्रों के निकट होने के कारण यह क्षेत्र तेजी से विकास की राह पर है।

इस पॉडकास्ट में मंडलायुक्त आञ्जनेय कुमार सिंह ने एक सिविल सेवक और प्रशासनिक अधिकारी के रूप में कार्य करने की शैली, मानसिकता और जिम्मेदारियों को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें साझा की हैं। एक अधिकारी के लिए उनके संबोधन से ये प्रमुख संदेश निकलते हैं:

  • कानूनी दायरे का सम्मान और लचीलापन: अधिकारियों को हमेशा कानून और विधिक व्यवस्था के दायरे में रहकर ही काम करना होता है। कई बार व्यवस्था के तहत कड़े फैसले लेने पड़ते हैं, लेकिन नियमों की इस सीमा के भीतर भी अधिकारियों के पास जनता के हित और बेहतरी के लिए काम करने का बहुत बड़ा अवसर (scope) होता है।
  • ‘कंफर्ट ज़ोन’ से बाहर निकलने की आदत: एक कुशल अधिकारी बनने के लिए लगातार खुद को आसान और सहज स्थिति (Comfort Zone) से बाहर रखना ज़रूरी है। दिनभर की थकान के बावजूद काम के प्रति ऊर्जा बनाए रखना और निरंतर सोचते रहना ही बेहतर परिणाम देता है।
  • सहानुभूति और जन-सेवा का भाव: प्रशासनिक पदों पर रहते हुए सिर्फ नियम लागू करना ही काफी नहीं है, बल्कि आम नागरिकों की समस्याओं को समझकर उनके जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में प्रयास करते रहना चाहिए।
  • समान नियम और खुद से शुरुआत: समाज से जिन बदलावों की अपेक्षा की जाती है, वे नियम प्रशासनिक व्यवस्था और स्वयं पर भी लागू होते हैं। जो व्यवहार हमें अपने लिए पसंद नहीं है, वह दूसरों के साथ नहीं किया जाना चाहिए।

ये सभी बिंदु किसी भी सिविल सेवक के लिए एक आदर्श कार्यशैली और प्रशासनिक दृष्टिकोण (Administrative Ethos) को दर्शाते हैं।

प्रशासनिक कार्यशैली और अधिकारियों के दायित्वों पर चर्चा करते हुए आञ्जनेय कुमार सिंह ने कहा कि अधिकारियों को हमेशा खुद को ‘कंफर्ट ज़ोन’ (सहज स्थिति) से बाहर रखने की आदत डालनी चाहिए। दिनभर की व्यस्तता और थकान के बाद भी निरंतर सोचते रहना और जन-समस्याओं के समाधान के लिए सक्रिय बने रहना ही एक कुशल अधिकारी की पहचान है।

“प्रशासनिक अधिकारियों को कई बार कानून और विधिक व्यवस्था के कड़े नियमों के तहत काम करना पड़ता है। लेकिन इन नियमों के दायरे में रहते हुए भी आम जनता की बेहतरी और विकास के लिए काम करने का बहुत बड़ा स्कोप होता है।”

— आञ्जनेय कुमार सिंह, मंडलायुक्त (मुरादाबाद)

समाज के लिए सीख: जो नियम दूसरों के लिए, वही खुद पर भी हों लागू

सामाजिक सुधारों पर बात करते हुए मंडलायुक्त ने कहा कि समाज को अपने भीतर सुधार की शुरुआत स्वयं से करनी चाहिए। जो नियम या व्यवस्था हम दूसरों पर लागू देखना चाहते हैं, उसे पहले खुद पर भी लागू करना होगा। जो बात हम अपने लिए पसंद नहीं करते, वह दूसरों के साथ भी नहीं की जानी चाहिए।

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