जामिया और UGC को कर्मचारियों के वेतन समानता (Pay Parity) दावों की जांच का निर्देश, दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा- “दशकों तक कर्मचारियों को बदतर स्थिति में नहीं छोड़ा जा सकता”

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जामिया और UGC को कर्मचारियों के वेतन समानता (Pay Parity) दावों की जांच का निर्देश

नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने जामिया मिलिया इस्लामिया (JMI) और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) को निर्देश दिया है कि वे विश्वविद्यालय में कार्यरत सहायक (Assistants) और उच्च श्रेणी लिपिक (UDC) कर्मचारियों के वेतनमान में समानता (Pay Parity) के दावों की व्यापक रूप से समीक्षा और जांच करें।

कोर्ट ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि किसी संस्थान में काम कर रहे कर्मचारियों को दशकों तक अन्य समकक्ष संस्थानों या केंद्रीय स्वायत्त निकायों के कर्मचारियों की तुलना में आर्थिक या पदोन्नति के दृष्टिकोण से कमजोर या बदतर (inferior) स्थिति में नहीं छोड़ा जा सकता।

मामला क्या है?

यह याचिका जामिया मिलिया इस्लामिया के कर्मचारियों की ओर से दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि उनके पद और जिम्मेदारियां अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालयों और UGC के तहत आने वाले संस्थानों के समकक्ष पदों के समान हैं, लेकिन इसके बावजूद उनके वेतनमान (Pay Scale) में लंबे समय से विसंगति बनी हुई है। उन्होंने मांग की कि उन्हें भी अन्य केंद्रीय संस्थानों के कर्मचारियों के बराबर वेतन और ग्रेड पे दिया जाए।

दिल्ली हाई कोर्ट की टिप्पणियाँ:

  1. वेतन विसंगतियों को दूर करने की आवश्यकता: अदालत ने टिप्पणी की कि जब जिम्मेदारियां और काम का स्वरूप एक जैसा हो, तो कर्मचारियों को केवल प्रशासनिक देरी या पुराने नियमों का हवाला देकर दशकों तक कम वेतन पर काम करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
  2. UGC और Jamia की संयुक्त जिम्मेदारी: कोर्ट ने कहा कि इस मामले में जामिया और UGC को मिलकर जल्द से जल्द एक समाधान निकालना चाहिए, ताकि कर्मचारियों के साथ अन्याय न हो।
  3. निर्णय की समय-सीमा: हाई कोर्ट ने UGC और जामिया प्रशासन को निर्देश दिया है कि वे कर्मचारियों के अभ्यावेदन (Representations) और दावों पर समयबद्ध तरीके से विचार करें और उचित निर्णय लें।

इस आदेश के बाद अब जामिया और UGC को मिलकर इन कर्मचारियों के वेतनमान को अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालयों के समकक्ष लाने के लिए आवश्यक कदम उठाने होंगे।