नई दिल्ली, 12 अप्रैल 2026 (ग्लोबल टुडे): उर्दू डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (UDO) ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राष्ट्रीय उर्दू भाषा प्रोत्साहन परिषद (NCPUL) का गठन पीएमओ (PMO) के स्पष्ट निर्देश के बावजूद ढाई साल से अटका हुआ है। UDO के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सैयद अहमद खान ने इसे उर्दू समुदाय के लिए चिंताजनक बताते हुए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
शिक्षा मंत्रालय की लापरवाही: बैठकें और नियुक्तियां रुकीं
डॉ. सैयद अहमद खान ने बताया कि NCPUL शिक्षा मंत्रालय के अधीन है, जहां अध्यक्ष का पद शिक्षा मंत्री का होता है। हालांकि, PMO के सकारात्मक जवाब के बावजूद संवैधानिक निकाय की कोई बैठक नहीं हुई। वाइस चेयरमैन की नियुक्ति भी अब तक नहीं हो सकी, और शिक्षा मंत्री ने न तो परिषद के कार्यों की समीक्षा की और न ही भविष्य के प्लानों पर चर्चा की।
“ये संस्थाएं भारत सरकार की मशीनरी का हिस्सा हैं, इसलिए इनकी विफलता के लिए केंद्र और राज्य सरकारें सीधे जिम्मेदार होंगी,” डॉ. खान ने कहा। इस देरी से उर्दू समुदाय में चिंता की लहर दौड़ गई है।
उर्दू राष्ट्रीय भाषा है, सांप्रदायिक नहीं: UDO की अपील
UDO के अध्यक्ष ने जोर दिया कि उर्दू किसी खास संप्रदाय या धर्म की भाषा नहीं, बल्कि भारत की राष्ट्रीय भाषा है जो करोड़ों लोगों के दिलों पर राज करती है। उन्होंने रेख्ता जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का उदाहरण दिया, जहां जश्न-ए-रेख्ता में टिकटों की बुकिंग मुश्किल हो जाती है—यह उर्दू की लोकप्रियता का प्रमाण है। हिंदी फिल्मों में उर्दू के सबसे ज्यादा इस्तेमाल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह भाषा वर्तमान जरूरतों के अनुरूप विकसित हो रही है।
UDO ने सरकार से गुजारिश की कि इस राष्ट्रीय मुद्दे को गंभीरता से लिया जाए और NCPUL को तुरंत सक्रिय बनाया जाए।
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