उर्दू डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद (एनसीपीयूएल) की कार्यकारिणी के शीघ्र गठन की मांग की है। संस्था के अध्यक्ष डॉ. सैयद अहमद खान ने कहा कि देरी से उर्दू भाषा के विकास से जुड़े कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
नई दिल्ली, 3 जनवरी: उर्दू डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (UDO) ने राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद (एनसीपीयूएल) की कार्यकारिणी के शीघ्र गठन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है।
संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सैयद अहमद खान ने कहा कि परिषद के गठन में हो रही देरी के कारण उर्दू भाषा के विकास और प्रचार-प्रसार से संबंधित कार्य प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस पत्र का उद्देश्य परिषद की कार्यक्षमता को सशक्त बनाना और उर्दू भाषा से जुड़े विकास कार्यों को गति देना है।

उर्दू भाषा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए डॉ. खान ने कहा कि उर्दू का जन्म और विकास भारत में हुआ है तथा यह आज भी देशभर में व्यापक रूप से बोली और सराही जाती है। उन्होंने कहा, “उर्दू सदैव प्रेम, संस्कृति और संवाद की भाषा रही है, जिसे आमजन और शासन—दोनों स्तरों पर सम्मान प्राप्त है।
”डॉ. खान ने बताया कि शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद की स्थापना इसी उद्देश्य से की गई थी, लेकिन पिछले तीन वर्षों से न तो उपाध्यक्ष की नियुक्ति हुई है और न ही परिषद की नई कार्यकारिणी गठित हो पाई है, जिससे इसकी गतिविधियाँ बाधित हो रही हैं।
उन्होंने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया कि परिषद की नई बॉडी का शीघ्र गठन किया जाए ताकि प्रशासनिक ढांचा सक्रिय हो सके और उर्दू भाषा के प्रचार-प्रसार से जुड़े कार्य प्रभावी रूप से आगे बढ़ सकें। उन्होंने कहा कि परिषद के पुनर्गठन से न केवल उर्दू भाषा को नई गति मिलेगी, बल्कि व्यापक जनहित में इसकी गतिविधियाँ भी फिर से आरंभ हो सकेंगी।
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