नई दिल्ली, 13 फरवरी 2026: विज्ञान भवन में शुक्रवार को आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम “कर्मयोग द्वारा सशक्त भारत” का उद्घाटन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया। कर्म को आध्यात्मिक चेतना, नैतिक मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व से जोड़ते हुए उन्होंने जिम्मेदार नागरिकता पर जोर दिया।
राष्ट्रपति ने प्रातःकालीन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि निष्काम भाव से किया गया कर्म राष्ट्र निर्माण का आधार बनेगा। “हर नागरिक को नैतिकता और आध्यात्मिकता अपनाकर समृद्ध राष्ट्र की नींव रखनी चाहिए। अनैतिकता मूल्यों का ह्रास करती है, जबकि निःस्वार्थ सेवा शांतिपूर्ण समाज का निर्माण करती है,” उन्होंने जोर देकर कहा।
प्रमुख वक्ताओं के विचार
- बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने गीता के उद्धरण से कर्मयोग को बंधनमुक्ति का मार्ग बताया। वासना त्यागकर अनासक्त भाव से कर्म करने पर परमात्मा प्राप्ति संभव है।
- ब्रह्माकुमारीज की राजयोगिनी जयंती दीदी ने आत्मा के मूल गुण विकसित कर कर्मयोगी बनने का आह्वान किया।
- राजयोगिनी आशा दीदी ने कहा कि कर्म के साथ परमात्मा-स्मरण से जीवन में सन्तुष्टि आती है।
मीडिया लॉन्चिंग और पैनल चर्चा
सायंकालीन सत्र में सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री डॉ. मुरुगन ने कार्यक्रम की मीडिया लॉन्चिंग की। उन्होंने फेक न्यूज को आध्यात्मिकता से समाप्त करने पर बल दिया, जिससे सशक्त भारत बनेगा।
पैनल चर्चा में इंडिया हैबिटेट सेंटर के निदेशक डॉ. केजी सुरेश, दूरदर्शन महानिदेशक के सथीश, हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. मोहित गुप्ता, अमेरिका से जूडी रोगर्स और संसद रत्न प्रियदर्शिनी राहुल शामिल हुए। चर्चा का संयोजन पत्रकार नारायणी गणेश ने किया।
प्रमुख उपस्थितजन
भारत-24 के अध्यक्ष जगदीश चंद्रा, मारवाह स्टूडियो के संदीप मारवाह, मधुबन न्यूज के बीके कोमल, मीडिया संयोजिका बीके सरला उपस्थित रहीं। धन्यवाद ज्ञापन मीडिया प्रभाग संयोजक बीके सुशांत ने दिया, जबकि संचालन बीके हुसैन ने किया।
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