दो साल से बैठक न होने पर डॉ. सैयद अहमद खान ने उठाए सवाल; लंबित परियोजनाओं को जल्द शुरू करने की मांग।
नई दिल्ली: उर्दू डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन के अध्यक्ष डॉ. सैयद अहमद खान ने राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद (NCPUL) की वर्तमान कार्यप्रणाली पर गहरा असंतोष व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि उर्दू के प्रचार-प्रसार से जुड़े महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स लंबे समय से ठप पड़े हैं, जिससे साहित्यिक और शैक्षणिक जगत में निराशा का माहौल है।
मुख्य चिंताएँ और मांगें:
- दो साल से कोई बैठक नहीं: डॉ. खान ने बताया कि पीएमओ (PMO) से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पिछले दो वर्षों से परिषद की कोई नियमित बैठक नहीं हुई है। उन्होंने इस स्थिति को ‘अत्यंत चिंताजनक’ करार दिया।
- प्रकल्पों का निलंबन: वित्तीय सहायता, नई प्रकाशन परियोजनाएं और प्रशिक्षण कार्यक्रम जैसे अहम कार्य अधर में लटके हुए हैं।
- प्रशासनिक सक्रियता की आवश्यकता: संस्था ने मांग की है कि परिषद को तुरंत सक्रिय किया जाए और लंबित मामलों के निपटारे के लिए आपातकालीन कदम उठाए जाएं।
सरकार से अपील
डॉ. सैयद अहमद खान ने सरकार और संबंधित मंत्रालय से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है। उन्होंने निम्नलिखित ठोस कदम उठाने की मांग की:
- परिषद की नियमित बैठकों का तत्काल आयोजन।
- रुकी हुई वित्त समिति (Finance Committee) का गठन।
- लंबे समय से लंबित प्रस्तावों और ग्रांट्स को जल्द मंजूरी।
“उर्दू भाषा और साहित्य के विकास के लिए बनाई गई योजनाएं तभी प्रभावी हो सकती हैं, जब संस्था व्यावहारिक रूप से सक्रिय रहे। परिषद की निष्क्रियता देश में उर्दू के प्रचार-प्रसार को बाधित कर रही है।” — डॉ. सैयद अहमद खान
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