‘गीतों का सफ़र – पार्ट 2’ ने सजीव कर दिया हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम गीतों का दौर

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नई दिल्ली: इंडिया हैबिटेट सेंटर के ‘द थिएटर’ में 17 अक्टूबर की शाम संगीत, अभिनय और नृत्य का अनोखा संगम देखने को मिला, जब कात्यायनी और थ्री आर्ट्स क्लब ने ‘गीतों का सफ़र – पार्ट 2’ का मंचन किया। कार्यक्रम ने दर्शकों को 1988 से 2000 के बीच के लोकप्रिय हिंदी फ़िल्म गीतों से होकर गुज़रने का अवसर दिया और पुराने समय की यादें ताज़ा कर दीं।

कार्यक्रम की शुरुआत निधिकान्त पाण्डेय और बुरहान क़ुरैशी ने दर्शकों के बीच से संवादों के माध्यम से की, जिसने माहौल को ऊर्जा से भर दिया। “एक-दो-तीन” गीत की धुन पर अंजिला गुगनानी की आवाज़ और आरती नैयर के नृत्य ने सभी का मन मोह लिया। इसके बाद बुरहान का “आजा शाम होने आई” पर अभिनय और फिर देवानंद झा का “पापा कहते हैं” गीत दर्शकों को रोमांचित कर गया।

निधिकान्त पाण्डेय की प्रभावशाली स्क्रिप्ट और प्रस्तुति ने संगीत, इतिहास, हास्य और भावनाओं का सुंदर संतुलन पेश किया। दर्शकों ने भी उनकी बातों पर पूरे जोश से प्रतिक्रिया दी, जिससे हॉल हर पल जीवंत बना रहा।

देवानंद झा और अंजिला गुगनानी ने लगभग 30 गीतों को जोश और अंदाज़ के साथ गाकर माहौल को संगीत से भर दिया। आरती नैयर के आठ नृत्य प्रस्तुतियों में लय, भाव और अभिव्यक्ति का सुंदर मेल देखने को मिला। संगत में जीतू (की-बोर्ड), अमित (ड्रम-पैड) और अधीर (तबला) ने कार्यक्रम की रौनक बढ़ा दी।

कार्यक्रम के अंत में जब निधिकान्त ने विदा लेने की घोषणा की, तो दर्शक एक स्वर में बोले — “अभी तो और गीत सुनने हैं!” यह उत्साह बताता है कि यह संगीतमय यात्रा दर्शकों के दिलों में बस गई।

निर्मात्री अनुराधा दर और सोहेला कपूर ने बताया कि अगला विशेष कार्यक्रम “गीतों की माला” 24 अक्टूबर को त्रिवेणी कला संगम, मंडी हाउस में होगा। इसमें देवानंद झा लगभग 21 प्रसिद्ध गायकों के गीत प्रस्तुत करेंगे। इसके अलावा, 2 नवम्बर को मुंबई में “आनंद ही आनंद” की 18वीं प्रस्तुति और 20 नवम्बर को इंडिया हैबिटेट सेंटर में अविकल कक्कड़ का शो “खाना और गाना” आयोजित किया जाएगा।

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