नई दिल्ली में धनतेरस के पावन अवसर पर मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के ‘जश्ने-चिराग़’ कार्यक्रम में इंद्रेश कुमार ने भारत को विश्व का असली शांति मॉडल बताया। उन्होंने नशा, दंगे और पर्यावरण संकट से मुक्त भारत बनाने का आह्वान किया, साथ ही सूफ़ी परंपरा और राष्ट्रीय एकता को जोड़ते हुए अमन का पैग़ाम दिया।
नई दिल्ली, 18 अक्टूबर: हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया दरगाह धनतेरस की शाम अद्भुत आध्यात्मिक रोशनी में जगमगा उठी, जब मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (MRM) द्वारा आयोजित वार्षिक ‘जश्ने-चिराग़’ कार्यक्रम में एकता, इंसानियत और राष्ट्रीय सद्भाव का रंग खिल उठा। दीयों की लौ और सूफ़ियाना कव्वालियों से सजे इस आयोजन में पूरे देश से आए श्रद्धालु ‘अमन और भाईचारे’ की दुआ के लिए इकठ्ठा हुए।
कार्यक्रम की अगुवाई मंच के संरक्षक इंद्रेश कुमार ने की। उन्होंने दरगाह पर चादर चढ़ाकर देश और विश्व शांति की दुआ मांगी और अपने संबोधन में कहा कि “भारत ही आज की दुनिया का असली शांति मॉडल है।” उन्होंने समाज से आह्वान किया कि “भारत को नशामुक्त, दंगामुक्त और पर्यावरण युक्त राष्ट्र बनाने की दिशा में सबको एकजुट होना चाहिए,” साथ ही शिक्षा, तरक़्क़ी और तहज़ीब को अपनाने की अपील की।
इंद्रेश कुमार ने कहा कि आज जब दुनिया के कई हिस्से — इज़रायल-फ़िलिस्तीन, यूक्रेन-रूस, अफ़ग़ानिस्तान, सूडान — हिंसा की चपेट में हैं, भारत अहिंसा और प्रेम का उज्ज्वल उदाहरण बना हुआ है। उन्होंने कहा, “यह बुद्ध, विवेकानंद, राम, गुरुनानक और गांधी की भूमि है, जिसने हमेशा मानवता और सह-अस्तित्व का संदेश दिया है।”

दरगाह के अध्यक्ष अफ़सर निज़ामी और सलमी निज़ामी ने कहा कि निज़ामुद्दीन औलिया की दरगाह हमेशा मोहब्बत और एकता का प्रतीक रही है। उन्होंने मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की इस पहल को सराहा और कहा कि “सूफ़ी परंपरा और राष्ट्रवाद परस्पर विरोधी नहीं, बल्कि एक ही दिशा में चलने वाले दो मार्ग हैं।”
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग (NCMEI) के कार्यवाहक अध्यक्ष डॉ. शाहिद अख्तर ने अपने संबोधन में कहा कि “भारत के लिए तालीम, तहज़ीब और तरक़्क़ी ही असली जवाब हैं। जब समाज शिक्षित होगा और संवाद करेगा, तभी नफ़रत और जंग का अंत संभव है।”
महिला प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय संयोजक डॉ. शालिनी अली ने कहा कि असली ‘धनतेरस’ वह है जब दिलों में रोशनी जले। उन्होंने युवाओं से नशा और नफ़रत छोड़कर देश को आगे बढ़ाने का आह्वान किया, और महिला नेतृत्व की भूमिका पर विशेष ज़ोर दिया।
वरिष्ठ पत्रकार शाहिद सईद ने कहा कि “भारत नफ़रत से नहीं, मोहब्बत से चलता है।” उन्होंने मीडिया और राजनीति के एक हिस्से पर आरोप लगाया कि वे समाज को तोड़ने वाली भाषा बोलते हैं, जबकि ऐसे कार्यक्रम भारत की आत्मा को मज़बूत करते हैं।
कार्यक्रम में कर्नल ताहिर, डॉ. सफीना, गौहर आसिफ, ठाकुर राजा रईस और अन्य गणमान्य हस्तियां मौजूद रहीं। सभी ने देश की एकता और अमन के लिए सामूहिक दुआ की।
समापन में इंद्रेश कुमार ने कहा कि “भारत केवल एक देश नहीं बल्कि एक विचार और सभ्यता है, जो अहिंसा, संविधानिक समानता और विश्व प्रेम का मार्ग दिखाती है।” उन्होंने ‘भारत पहले, इंसानियत सर्वोपरि’ के सिद्धांत को राष्ट्रनिर्माण का मूल मंत्र बताया।
धनतेरस की इस रूहानी शाम ने यह संदेश दिया कि भारतीय मुसलमान की असली पहचान शिक्षा, तहज़ीब और तरक़्क़ी से जुड़ी है। दरगाह से उठा यह अमन का पैग़ाम अब पूरे देश में गूंज रहा है – भारत शांति का संदेशवाहक है और रहेगा।
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