धनबाद (झारखंड): इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) धनबाद और टेक बॉन्ड ग्लोबल के बीच एक महत्वपूर्ण समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर हुआ हैं. इस समझौते के तहत संस्थान में एडवांस इंडस्ट्रियल बॉन्डिंग तकनीकों पर केंद्रित एक अत्याधुनिक रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) सेंटर स्थापित किया जाएगा. यह सेंटर एडवांस्ड मटीरियल और साइंटिफिक इनोवेशन में कटिंग-एज रिसर्च के लिए एक हब के तौर पर काम करेगा. हालांकि यह भारत में है, लेकिन इसका विजन देश की सीमाओं से कहीं आगे तक फैला हुआ है, जिसका मकसद प्रैक्टिकल और डिप्लॉयेबल टेक्नोलॉजी के जरिए ग्लोबल प्रोग्रेस में योगदान देना और असल दुनिया की चुनौतियों का सामना करना है. यह अहम करार शिक्षा मंत्रालय के प्रमुख R&D फेयर ‘IInvenTiv 2026’ के दौरान हुआ, जिसका उद्घाटन झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने किया.
ग्लोबल एक्सपर्ट्स और छात्रों का बनेगा साझा मंच
इस रणनीतिक सहयोग के जरिए भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोप के शीर्ष शोधकर्ता, वैज्ञानिक और इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स एक मंच पर आएंगे, जिससे इंडस्ट्रियल बॉन्डिंग के क्षेत्र में इनोवेशन को बढ़ावा मिलेगा. IIT धनबाद के छात्रों और PhD शोधार्थियों को इन वैश्विक विशेषज्ञों के साथ काम करने का सीधा अवसर मिलेगा. इससे छात्र अंतर्राष्ट्रीय शोध पद्धतियों को करीब से समझ सकेंगे और रियल-वर्ल्ड एप्लीकेशन वाली तकनीकें विकसित करने का कौशल हासिल कर पाएंगे. इस पहल से उम्मीद है कि यह उन्नत विनिर्माण के क्षेत्र में एक अग्रणी देश के तौर पर भारत की स्थिति को मजबूत करेगी, और साथ ही वैश्विक वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति में भी सार्थक योगदान देगी.
क्या है ‘मॉलिक्यूलर इंटीग्रेशन टेक्नोलॉजी’?
टेक बॉन्ड ग्लोबल के इनोवेशन का मुख्य आधार उनकी खास ‘मॉलिक्यूलर इंटीग्रेशन टेक्नोलॉजी’ है. पारंपरिक चिपकाने वाले पदार्थों (Adhesives) के विपरीत, यह तकनीक मॉलिक्यूलर (अणु) स्तर पर चीजों को जोड़ती है. यह धातुओं और पॉलीमर के बीच एक बेहद मजबूत बॉन्डिंग तैयार करती है.
इस तकनीक के प्रमुख फायदे:
- कंपन (Vibration) और यांत्रिक थकान के खिलाफ मजबूत प्रतिरोध.
- बदलते तापमान (Thermal Cycling) में भी भरोसेमंद और बेहतरीन प्रदर्शन.
- नमी और खतरनाक रसायनों से सुरक्षा.
- परतों के अलग होने का खतरा कम और लॉन्ग-टर्म रिलायबिलिटी।
लीडरशिप का क्या कहना है?
टेक बॉन्ड ग्लोबल के CEO डोनाल्ड डब्ल्यू. मेयर्स ने कहा, “भारत एक रोमांचक मोड़ पर है. IIT धनबाद में हम एक R&D केंद्र बना रहे हैं. IIT धनबाद का यह R&D सेंटर सिर्फ भारत के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए इनोवेशन को आगे बढ़ाएगा. भारतीय युवाओं का दिमाग इनोवेशन, लर्निंग और मैन्युफैक्चरिंग में सबसे आगे है.”
IIT धनबाद के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर और प्रोफेसर-इन-चार्ज (R&D) प्रो. सार्थक एस. सिंह ने तकनीक के फायदों को समझाते हुए बताया, “माइनिंग सेक्टर में इस्तेमाल होने वाले HDPE पाइप्स में अक्सर दरारें आ जाती हैं और उनकी मरम्मत करना बहुत मुश्किल होता है. टेक बॉन्ड की पेटेंटेड तकनीक इस समस्या का सटीक समाधान है. उनकी ‘क्विक रैप’ प्रणाली क्षतिग्रस्त पाइपों को एक घंटे से भी कम समय में ठीक कर सकती है. इसका फायदा एयरोस्पेस, रक्षा और ऑटोमोटिव जैसे सेक्टर्स को भी बड़े पैमाने पर मिलेगा.”
वहीं, IIT धनबाद के डीन (R&D) ने इसे इंडस्ट्री-एकेडेमिया पार्टनरशिप का एक अहम पड़ाव बताया. उन्होंने कहा, ‘टेक बॉन्ड ग्लोबल के साथ यह MoU, इंडस्ट्री और एकेडेमिया के बीच असरदार सहयोग को बढ़ावा देने के हमारे मिशन में एक अहम पड़ाव है. अपनी अत्याधुनिक रिसर्च क्षमताओं को Tech Bond की इंडस्ट्रियल विशेषज्ञता के साथ मिलाकर, हम पॉलीमर बॉन्डिंग प्रक्रियाओं में इनोवेशन के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार कर रहे हैं. यह साझेदारी अगली पीढ़ी की टेक्नोलॉजी के विकास को तेज करेगी, साथ ही यह भी पक्का करेगी कि हमारे छात्र और शोधकर्ता इंजीनियरिंग की जटिल और असल दुनिया की चुनौतियों को हल करने में सबसे आगे रहें.”
‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ को मिलेगा बल
टेक बॉन्ड ग्लोबल और IIT धनबाद की यह साझेदारी भारत सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ विजन के पूरी तरह अनुरूप है. यह पहल देश को एडवांस मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में एक ग्लोबल लीडर के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है. टेक बॉन्ड ग्लोबल एक टेक्नोलॉजी-आधारित कंपनी है, जो जटिल औद्योगिक चुनौतियों के लिए टिकाऊ, सुरक्षित और लागत प्रभावी अगली पीढ़ी के समाधान प्रदान करने में विशेषज्ञता रखती है.
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