OTT पर ‘सर सैयद अहमद खान: द मसीहा’ का ऐतिहासिक तूफान: मिल रही रिकॉर्ड व्यूअरशिप , ग्लोबल ट्रेंडिंग में बनाई जगह!

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नई दिल्ली: इसे सिर्फ एक ‘स्ट्रीमिंग सक्सेस’ कहना इस फिल्म के साथ नाइंसाफी होगी, क्योंकि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर इस समय जो हो रहा है, वह एक ऐतिहासिक क्रांति है! Apple TV+ और Google Play Movies पर फिल्मकार शोएब चौधरी की महागाथा ‘Sir Syed Ahmad Khan: The Messiah’ ने इस समय व्यूअरशिप के सारे पुराने रिकॉर्ड्स को मटियामेट कर दिया है। सोशल मीडिया से लेकर हर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सिर्फ इसी फिल्म की चर्चा है और यह लगातार टॉप ट्रेंड्स में बनी हुई है।

यह अभूतपूर्व सफलता केवल आंकड़ों की कहानी नहीं है, बल्कि यह फिल्मकार शोएब चौधरी के वर्षों के खून-पसीने, अटूट त्याग और उस विजन की जीत है, जिसे दुनिया नामुमकिन मान रही थी।

मेनस्ट्रीम सिनेमा को पछाड़, 5 घंटे की ऐतिहासिक बायोपिक ने रचा इतिहास

आज के इस दौर में, जहाँ दर्शक चंद सेकेंड्स के रील्स और कमर्शियल मसाला फिल्मों के आदी हो चुके हैं, वहाँ लगभग 5 घंटे लंबी, उर्दू-हिंदी भाषा में बनी एक शिक्षा सुधारक की ऐतिहासिक बायोपिक का दुनिया भर में सबसे ज्यादा देखी जाने वाली फिल्मों में शुमार होना किसी चमत्कार से कम नहीं है!

बड़े बजट, भारी-भरकम स्टारकास्ट और फॉर्मूला फिल्मों के इस दौर में, इस स्वतंत्र फिल्म (Indie Film) ने हर कमर्शियल सिनेमा को पीछे छोड़ दिया है। दर्शक इस समय स्क्रीन से चिपके हुए हैं, जो यह साबित करता है कि अगर कहानी में दम हो, तो दर्शक उसे सर-आँखों पर बिठाते हैं।

19वीं सदी का वो दौर, जिसने दर्शकों को बांध दिया

शोएब चौधरी और परवीन अख्तर अली द्वारा निर्मित यह फिल्म सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि एक टाइम-मशीन है जो दर्शकों को सीधे 1857 के उस दौर में ले जाती है, जहाँ मुस्लिम समाज का आत्मविश्वास टूट चुका था। अल्ताफ हुसैन हाली की मशहूर किताब ‘हयात-ए-जावेद’ पर आधारित यह फिल्म अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के संस्थापक सर सैयद के आधुनिक शिक्षा और वैज्ञानिक सोच के लिए किए गए संघर्ष को इतनी शिद्दत से दिखाती है कि दर्शक भावुक हो रहे हैं।

डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर दर्शक अब इस फिल्म की भव्यता, उम्दा उर्दू तहज़ीब, गहरे दर्शन और बेमिसाल राजनीति को देखकर दांतों तले उंगलियां दबा रहे हैं।

AMU से जुड़ा भावनात्मक रिश्ता: इस फिल्म का क्रेज तब और बढ़ गया जब Aligarh Muslim University के ऐतिहासिक कैनेडी हॉल में खुद कुलपति की मौजूदगी में इसका भव्य प्रीमियर हुआ। यह सिर्फ एक स्क्रीनिंग नहीं थी, बल्कि सर सैयद को उनके अपने ही बनाए संस्थान में दी गई अब तक की सबसे भव्य और भावुक श्रद्धांजलि थी।

अभिनय का शिखर: शोएब चौधरी का वो अवतार जिसने सबको चौंकाया

फिल्म की स्टारकास्ट में Zarina Wahab, Deepak Parashar और Arif Zakaria जैसे दिग्गजों ने अपनी अदाकारी से फिल्म में चार चांद लगाए हैं। लेकिन, असली महफिल लूट ली है खुद शोएब चौधरी ने!

इस भव्य सेट, ऐतिहासिक परिधानों और भारी प्रोस्थेटिक मेकअप के पीछे एक ऐसा वन-मैन आर्मी फिल्मकार था, जिसने इस रोल के लिए अपनी जान फूंक दी:

  • ट्रिपल रोल की जिम्मेदारी: उन्होंने न सिर्फ फिल्म को प्रोड्यूस और सह-लेखन किया, बल्कि सर सैयद के युवा अवतार से लेकर उनके वृद्ध होने तक के हर एक इमोशन को अपने अभिनय से अमर कर दिया।
  • कठिन परीक्षा: घंटों का भारी प्रोस्थेटिक मेकअप और भावनात्मक रूप से थका देने वाले सीन्स के बावजूद, बिना किसी बड़े स्टूडियो के सपोर्ट के, शोएब चौधरी डटे रहे। आर्थिक तंगी और सीमित संसाधनों के बीच उनका यह जुनून आज रंग लाया है।

शब्द-शब्द में भावनाएं: मुत्यिम कमाली का बेमिसाल लेखन और 19वीं सदी का वो दौर

इस ऐतिहासिक महागाथा की सबसे मजबूत रीढ़ इसका लेखन है। विख्यात लेखक मुत्यिम कमाली (Mutyim Kamalee) की कलम ने इस फिल्म की स्क्रिप्ट और संवादों में वो जान फूंकी है, जो सीधे दर्शकों के दिलों को छू रही है। अल्ताफ हुसैन हाली की मशहूर किताब ‘हयात-ए-जावेद’ पर आधारित यह कहानी दर्शकों को सीधे 1857 के उस दौर में ले जाती है, जहाँ मुस्लिम समाज का आत्मविश्वास टूट चुका था।

परवीन अली (Parveen Ali) और शोएब चौधरी (Shoaib Choudhary) द्वारा बेहद भव्य स्तर पर निर्मित यह फिल्म अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के संस्थापक सर सैयद के आधुनिक शिक्षा और वैज्ञानिक सोच के लिए किए गए संघर्ष को इतनी शिद्दत से दिखाती है कि दर्शक भावुक हो रहे हैं।

दिग्गज कलाकारों की टुकड़ी और असीम-अरशद का जादुई निर्देशन

फिल्म को परदे पर एक मास्टरपीस की तरह उतारने का श्रेय इसकी निर्देशन टीम को जाता है। असीम श्रीवास्तव (Aseem Srivastava) और अरशद अहमद (Arshad Ahmad) की निर्देशन टीम (Direction Team) ने बारीकियों के साथ इस जटिल कालखंड को कैमरे पर जीवित किया है।

वहीं, फिल्म की स्टारकास्ट ने अभिनय के नए प्रतिमान स्थापित किए हैं। Zarina Wahab, Deepak Parashar और Arif Zakaria जैसे महान कलाकारों के साथ-साथ सिनेमा जगत के कई बेहतरीन चेहरों ने इस फिल्म को और भी समृद्ध बनाया है:

  • Akshay Anand और Mir Sarwar ने अपनी कड़क और संजीदा अदाकारी से कहानी को गजब की गहराई दी है।
  • Diksha Tiwari और Shraddha Singh ने अपनी भूमिकाओं में भावनाओं का ऐसा रस घोला है कि दर्शक खुद को जुड़ा हुआ महसूस कर रहे हैं।
  • Yaqub Ghauri और Nayyer Jaffry के सधे हुए अभिनय ने इस ऐतिहासिक ड्रामा को एक अलग ही गरिमा और मजबूती प्रदान की है।

विडंबना बदली इतिहास में: दुनिया कर रही है सलाम

जिस तन्हाई और संघर्ष में यह फिल्म बनी थी, आज वही संघर्ष इसकी सबसे बड़ी यूएसपी (USP) बन चुका है। Apple TV+ और Google Play Movies पर इस समय उर्दू प्रेमियों, इतिहास के दीवानों और सार्थक सिनेमा की तलाश करने वाले दर्शकों का ऐसा सैलाब आया है कि फिल्म की रेटिंग्स आसमान छू रही हैं।

‘Sir Syed Ahmad Khan: The Messiah’ को मिल रहा यह ग्लोबल रिस्पॉन्स सिर्फ सर सैयद के विचारों की प्रासंगिक जीत नहीं है, बल्कि शोएब चौधरी के उस जिद की जीत है जिसने नामुमकिन को मुमकिन कर दिखाया। इस फिल्म ने साबित कर दिया है कि जब नीयत साफ हो और कहानी में ईमानदारी हो, तो वो इतिहास रचने से कभी नहीं चूकती!

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