नई दिल्ली: अल काजी उर्दू अकादमी की ओर से नई दिल्ली स्थित एनएफसी में उर्दू भाषा और साहित्य के प्रचार-प्रसार तथा इससे जुड़ी प्रमुख हस्तियों के सम्मान में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। पद्म श्री प्रो. अख्तरूल वासे की अध्यक्षता में आयोजित इस समारोह में उर्दू की वर्तमान स्थिति, चुनौतियों और इसके संरक्षण पर गंभीर चर्चा हुई।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अकादमी की संस्थापक एडवोकेट शाह जबीं काजी ने कहा कि उर्दू की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है और यह भाषा कभी खत्म नहीं हो सकती। वहीं, डॉ. सैयद अहमद खान ने कहा कि उर्दू बोलने-समझने वालों की संख्या बढ़ने के बावजूद पाठकों की संख्या में कमी चिंता का विषय है, जिसे बढ़ाने के लिए ‘उर्दू डे तहरीक’ और सरकारी संस्थाओं को मिलकर प्रयास करने होंगे।
समारोह में वक्ताओं ने उर्दू को भारत की गंगा-जमुनी तहजीब और साझा संस्कृति की पहचान बताते हुए नई पीढ़ी को जोड़ने के लिए डिजिटल माध्यमों और शिक्षण संस्थानों में इसे बढ़ावा देने की बात कही। इस अवसर पर सिराजुद्दीन कुरैशी, मशहूर शायर मोईन शादाब, वरिष्ठ पत्रकार सोहैल अंजुम, मासूम मुरादाबादी और यूएनआई के पूर्व चीफ सब-एडिटर जावेद अख्तर समेत साहित्य और पत्रकारिता जगत की कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं।
- ऐतिहासिक तिब्बिया कॉलेज को मिले विश्वविद्यालय का दर्जा, दिल्ली भारतीय चिकित्सा परिषद के गठन की भी मांग: यूनानी तिब्बी कांग्रेस

- पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय एंड्रयूज गंज में ‘राष्ट्रीय एकता पर्व 2026’ का आयोजन, विविधताओं का दिखा शानदार संगम

- ‘जड़ों से जुड़ें’: नफरत के खिलाफ राष्ट्रीय मुहिम का शंखनाद, इंद्रेश बोले—”धर्म अलग, लेकिन जड़ें और वतन एक”

- राष्ट्रीय सम्मान अपमान रोकथाम संशोधन कानून की समीक्षा करे सरकार, देशभक्ति को किसी एक गीत से न नापें: जमाअत-ए-इस्लामी हिंद

- जामिया और UGC को कर्मचारियों के वेतन समानता (Pay Parity) दावों की जांच का निर्देश, दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा- “दशकों तक कर्मचारियों को बदतर स्थिति में नहीं छोड़ा जा सकता”

