दहेज की मांग और प्रताड़ना पड़ी भारी: पति को हर महीने ₹20 हजार और ₹3 लाख मुआवजा देने का कोर्ट का आदेश

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बदायूँ/सहसवान: शादी के कुछ ही घंटों बाद दुल्हन के साथ मारपीट, दहेज उत्पीड़न और घरेलू हिंसा करना पति व उसके परिवार को महंगा पड़ गया। सहसवान स्थित न्यायिक मजिस्ट्रेट हरेन्द्र सिंह की अदालत ने ‘घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005’ के तहत एकपक्षीय सुनवाई करते हुए पीड़िता सृष्टि माहेश्वरी के पक्ष में बड़ा निर्णय सुनाया है।

कोर्ट ने पति अंकुश माहेश्वरी को निर्देश दिया है कि वह पीड़िता को हर महीने ₹20,000 (₹15,000 भरण-पोषण + ₹5,000 मकान किराया) अदा करेगा। इसके अलावा, ₹3 लाख का एकमुश्त मुआवजा (क्षतिपूर्ति) भी एक महीने के भीतर देना होगा।

विदाई के तुरंत बाद शुरू हुई प्रताड़ना

पीड़िता ने अदालत को बताया कि 8 जून 2025 को विदाई के तुरंत बाद पति, सास और ससुर ने उसे कमरे में ले जाकर ‘मिलनी’ में कम पैसे मिलने का ताना दिया। पति ने उसके साथ मारपीट की और सास ने सोने के गहने व चूड़ियां उतरवाकर उसे कमरे में बंद कर दिया।

इसके बाद आरोपी उसे वृन्दावन ले गए, जहाँ उसके बाकी जेवर भी छीन लिए गए। ससुराल पक्ष की ओर से मायके वालों को अपमानित करते हुए ₹20 लाख नकद और किया सेल्टॉस (Kia Seltos) कार की मांग की गई। मांग पूरी न होने पर उसे लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया।

गहने, डिग्रियां और पासपोर्ट तक कर लिया ज़ब्त

परिवादिनी के अनुसार, आरोपियों ने उसके सभी आभूषण, हाईस्कूल, बी.कॉम, एलएलबी की डिग्रियां और पासपोर्ट अपने कब्जे में रख लिए। बाद में उसे सिर्फ पुराने कपड़ों में मायके भेज दिया गया और चेतावनी दी गई कि मांग पूरी होने पर ही उसे वापस बुलाया जाएगा।

आरोपी नहीं पहुंचे कोर्ट, अदालत ने सुनाया एकपक्षीय फैसला

न्यायालय द्वारा बार-बार नोटिस जारी करने के बावजूद आरोपी पक्ष से कोई भी अदालत में पेश नहीं हुआ और न ही कोई जवाब दाखिल किया। इस पर कोर्ट ने पीड़िता के शपथ पत्र, गवाहों के बयान, एफआईआर (FIR) और दहेज सामग्री की सूची के आधार पर एकपक्षीय फैसला सुनाया।

अदालत ने माना कि पत्नी को बिना वजह छोड़ना और दहेज के लिए प्रताड़ित करना स्पष्ट रूप से घरेलू हिंसा है, और पत्नी का भरण-पोषण करना पति का कानूनी कर्तव्य है।

कोर्ट के आदेश के मुख्य बिंदु:

  • मासिक भत्ता: पति हर महीने की 10 तारीख तक पीड़िता को ₹20,000 (₹15 हजार भरण-पोषण + ₹5 हजार किराया) देगा।
  • एकमुश्त मुआवजा: ₹3 लाख की क्षतिपूर्ति राशि एक महीने के अंदर चुकानी होगी।
  • सास-ससुर की जिम्मेदारी: यदि पति भुगतान करने में असमर्थ रहता है, तो ससुर नीरज माहेश्वरी और सास उपदेश माहेश्वरी उर्फ पिंकी माहेश्वरी इस राशि को देने के लिए बाध्य होंगे।
  • पुलिस को निर्देश: सहसवान (बदायूँ) और वृन्दावन (मथुरा) थाना प्रभारियों को निर्देश दिया गया है कि यदि पीड़िता के साथ दोबारा कोई हिंसा होती है, तो तत्काल सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

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