मस्जिदों को सांप्रदायिक निशाना बनाकर ढहाना राष्ट्रीय शर्म की बात, देश में बढ़े भ्रष्टाचार पर ‘जमाअत’ ने जताई चिंता

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नई दिल्ली, 04 जुलाई 2026 जमाअत-ए-इस्लामी हिंद (JIH) के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने देश में अल्पसंख्यकों व उनकी मस्जिदों को निशाना बनाए जाने, बढ़ते भ्रष्टाचार, मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और भारतीय लोकतंत्र के सामने खड़ी चुनौतियों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। नई दिल्ली स्थित JIH मुख्यालय में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए संगठन के नेताओं ने इन मुद्दों पर सरकार और प्रशासन को आड़े हाथों लिया।

सीमावर्ती जिलों में प्रशासनिक कार्रवाई के नाम पर नुकसान

प्रेस कॉन्फ्रेंस में जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के राष्ट्रीय सचिव शफी मदनी ने बताया कि संगठन का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल हाल ही में 29 जून से 2 जुलाई तक जमीनी स्थिति का जायजा लेने के लिए राजस्थान के बाड़मेर, जैसलमेर और जोधपुर जिलों के दौरे पर था।

दौरे की रिपोर्ट साझा करते हुए शफी मदनी ने कहा,

“राजस्थान, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली जैसे राज्यों में एक परेशान करने वाला पैटर्न दिख रहा है। पिछले एक महीने में ही अतिक्रमण-रोधी और इंफ्रास्ट्रक्चर अभियानों के नाम पर कई मस्जिदों को ढहाया गया है। राजस्थान के सीमावर्ती जिलों (बाड़मेर, जैसलमेर और बीकानेर) में सुरक्षा के नाम पर मस्जिदें, दरगाहें और मदरसे ध्वस्त किए गए हैं, जिससे स्थानीय लोगों में डर का माहौल है। मस्जिदों को सांप्रदायिक रूप से निशाना बनाकर ढहाना राष्ट्रीय शर्म की बात है और इसे तुरंत रोका जाना चाहिए।”

उन्होंने आरोप लगाया कि कई जगहों पर कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना एकतरफा कार्रवाई की गई और निजी जमीनों पर स्थित धार्मिक स्थलों को भी नुकसान पहुंचाया गया। उन्होंने यह भी कहा कि समान मुद्दे होने के बावजूद दूसरे समुदायों के पूजा स्थलों को छोड़ दिया गया। हालांकि, मदनी ने बाड़मेर, बीकानेर और जैसलमेर के हिंदू समुदाय की सराहना की, जो इस संकट की घड़ी में अपने मुस्लिम पड़ोसियों के साथ एकजुट होकर खड़े रहे।

मंत्रियों और अफसरों पर भ्रष्टाचार के आरोपों से गहराया नैतिक संकट

देश में बढ़ते भ्रष्टाचार पर चिंता जताते हुए JIH के उपाध्यक्ष प्रो. सलीम इंजीनियर ने कहा कि मंत्रियों, वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों के खिलाफ आ रहे भ्रष्टाचार के मामले शासन और संस्थागत जवाबदेही के गहरे संकट को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा, “भ्रष्टाचार अब केवल राजनीति या नौकरशाही तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन संस्थानों तक भी पहुंच गया है जिन पर लोगों की गहरी श्रद्धा है। भारत को इस समय संरचनात्मक सुधारों के साथ-साथ नैतिक जागृति की भी सख्त जरूरत है।”

SIR प्रक्रिया: मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटने का दावा

दिल्ली, कर्नाटक, महाराष्ट्र, झारखंड और मेघालय में चल रही मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पर बोलते हुए प्रो. सलीम इंजीनियर ने कहा कि इसके कारण बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं के नाम कट गए हैं, क्योंकि वे तय समय में दस्तावेज जमा नहीं कर पाए थे। उन्होंने चिंता जताई कि यह प्रक्रिया धीरे-धीरे केवल मतदाता सूची संशोधन न रहकर नागरिकता सत्यापन प्रक्रिया का रूप लेती जा रही है।

JIH ने भारत के चुनाव आयोग से मांग की है कि वह इस प्रक्रिया को पारदर्शी, नागरिक-अनुकूल बनाए और इसके लिए पर्याप्त समय दे। संगठन ने नागरिकों की मदद के लिए कई राज्यों में जागरूकता शिविर भी लगाए हैं।

लोकतंत्र के सामने चुनौतियां और जांच एजेंसियों का चयनात्मक उपयोग

महाराष्ट्र, झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के राजनीतिक घटनाक्रमों का हवाला देते हुए जमाअत ने दलबदल, राजनीतिक अस्थिरता और विपक्षी नेताओं को डराने-धमकाने के प्रयासों की निंदा की। प्रो. सलीम इंजीनियर ने आरोप लगाया कि राजनीतिक रूप से संवेदनशील समय में जांच और प्रवर्तन एजेंसियों का चयनात्मक (selective) उपयोग किया जा रहा है। इसके साथ ही देश के सार्वजनिक विमर्श में बढ़ती नफरत, ध्रुवीकरण और असहिष्णुता पर भी चिंता जताई गई।

जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने सभी राजनीतिक दलों और संवैधानिक संस्थाओं से कानून के शासन, लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक नैतिकता को बनाए रखने की अपील की है।

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