ANI संपादक स्मिता प्रकाश पर फेक न्यूज चलाने का गंभीर आरोप, लखनऊ अदालत में मामला दर्ज

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश के लखनऊ की एक अदालत ने ANI की एडिटर स्मिता प्रकाश (Smita Prakash) के खिलाफ चुनाव आयोग के नाम से झूठी खबरें प्रकाशित करने के आरोप में मामला दर्ज किया है। यह मामला पूर्व IPS अधिकारी अमिताभ ठाकुर की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया है।

अदालत का आदेश

लखनऊ के न्यायिक मजिस्ट्रेट-III की अदालत ने 11 सितंबर 2025 को पारित अपने आदेश में कहा, “शिकायत और लिखित बयान को सुनने और देखने के बाद, इस स्तर पर, क्षेत्रीय न्यायाधिकार या आधारों की पर्याप्तता में प्रवेश किए बिना, शिकायत प्रक्रियात्मक रूप से सही पाई गई है। BNSS के अध्याय XV के प्रावधानों के संदर्भ में, शिकायत को शिकायत मामले के रूप में दर्ज किया जाना आवश्यक है”।

अदालत ने आदेश दिया कि “इस मामले को शिकायत मामले के रूप में दर्ज किया जाए। शिकायतकर्ता को 26 सितंबर 2025 को अपने बयान की शपथ के तहत रिकॉर्डिंग के लिए उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है” ।

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शिकायत के मुख्य आरोप

अमिताभ ठाकुर ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि ANI ने चुनाव आयोग के नाम से बार-बार ऐसे बयान प्रकाशित किए हैं जो न तो आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किए गए थे और न ही उसके सत्यापित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किए गए थे। उनका कहना है कि इससे बिना किसी आधिकारिक समर्थन के आयोग के नाम से झूठी खबरें फैलाने का काम हुआ है ।

अगस्त 2025 की घटनाएं

शिकायत में अगस्त 2025 की कई घटनाओं का जिक्र किया गया है, जिसमें ANI के X पोस्ट और न्यूज रिपोर्ट शामिल हैं जो चुनाव आयोग की आधिकारिक पुष्टि से पहले या उसके बिना प्रकाशित की गई थीं। विशेष रूप से, ठाकुर ने ANI के 1 अगस्त 2025 के दोपहर 3:08 बजे के पोस्ट का उल्लेख किया है, जिसमें राहुल गांधी के वोट चोरी के आरोपों पर चुनाव आयोग की आपत्ति का कथित बयान था ।

शिकायतकर्ता का पक्ष

अमिताभ ठाकुर ने अपनी शिकायत में कहा है, “शिकायतकर्ता की जानकारी के अनुसार, स्मिता प्रकाश द्वारा संचालित ANI द्वारा चुनाव आयोग के नाम से कई खबरें रिले की गई हैं, जिनके पास इसे बैकअप करने के लिए कोई आधिकारिक तथ्य या सबूत नहीं है, पूरी तरह से अपने दम पर। इस प्रकार, ANI द्वारा रिले की गई कई खबरें हैं, जो न तो आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर हैं, न ही उनकी सामाजिक साइटों पर, न ही किसी आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस या प्रेस इंटरैक्शन आदि के माध्यम से प्रस्तुत की गई हैं” ।

पुलिस के बजाय अदालत का रुख

ठाकुर ने यह भी बताया कि हालांकि वे FIR दर्ज कराने के लिए पुलिस से संपर्क कर सकते थे, लेकिन विभिन्न कारकों के कारण पुलिस के प्रभावित होने की प्रबल संभावना थी। इसलिए, उन्होंने अदालत के सामने सीधे शिकायत दर्ज करना अधिक उपयुक्त समझा।

राहुल गांधी मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला राहुल गांधी के वोट चोरी के आरोपों की पृष्ठभूमि में आया है, जिसमें उन्होंने चुनाव आयोग पर BJP की सहायता करने और नकली मतदाताओं के साथ चुनावी सूची बढ़ाने का आरोप लगाया था। चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज कर दिया था और राहुल गांधी से एक हलफनामा या देश से माफी मांगने को कहा था।

शिकायतकर्ता का कहना है कि इस संदर्भ में ANI ने चुनाव आयोग के नाम से ऐसे बयान प्रकाशित किए जो आधिकारिक तौर पर जारी नहीं किए गए थे, जिससे “आयोग के नाम पर मनमानी और स्व-कल्पित, स्व-घोषित और झूठी जानकारी/समाचार” का प्रसार हुआ।

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