‘तनखइया’ टिप्पणी मामला: आजम खान को बड़ा झटका, सेशन कोर्ट ने बरकरार रखी 2 साल की सजा; अब हाई कोर्ट जाने की तैयारी

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रामपुर: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अधिकारियों को लेकर की गई ‘तनखइया’ (जूते साफ कराने) संबंधी विवादित टिप्पणी के मामले में सेशन कोर्ट से उन्हें बड़ा झटका लगा है। अदालत ने निचली अदालत (मजिस्ट्रेट कोर्ट) द्वारा दी गई दो साल के कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा को बरकरार रखा है। सेशन कोर्ट ने आजम खान की ओर से दायर पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया है, जिसके बाद अब उनका पक्ष हाई कोर्ट जाने की तैयारी में है।

क्या था पूरा मामला?

यह पूरा विवाद आजम खान के एक चुनावी जनसभा के दौरान दिए गए विवादित बयान से जुड़ा है। उन्होंने अधिकारियों पर तंज कसते हुए कहा था:

“देखे हैं मायावती जी के फोटो। कैसे बड़े-बड़े अफसर रुमाल निकालकर जूते साफ करते हैं। उन्हीं से गठबंधन है। उनके ही जूते साफ कराऊंगा इनसे अल्लाह ने चाहा।”

इस अमर्यादित टिप्पणी को लेकर दर्ज मुकदमे में रामपुर की एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट (मजिस्ट्रेट ट्रायल) ने आजम खान को दोषी माना था। अदालत ने 16 मई 2026 को उन्हें दो साल के कठोर कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।

सेशन कोर्ट में हुई तीखी बहस

मजिस्ट्रेट कोर्ट के इस फैसले को चुनौती देते हुए आजम खान ने एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट (सेशन ट्रायल) में अपील दाखिल की थी।

  • बचाव पक्ष की दलील: आजम खान की ओर से उनके वरिष्ठ अधिवक्ता विनोद कुमार शर्मा ने अदालत में बहस की और सजा को गलत बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की।
  • अभियोजन पक्ष का विरोध: वहीं, राज्य सरकार की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (ADGC) सीमा राणा ने अपील पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई और दलील दी कि जनप्रनिधियों द्वारा ऐसे बयानों से समाज और प्रशासनिक व्यवस्था पर गलत असर पड़ता है।

अदालत ने बरकरार रखा फैसला, अब हाई कोर्ट का रुख

दोनों पक्षों की लंबी और विस्तृत बहस सुनने के बाद शनिवार को अदालत ने अपना फैसला सुनाया। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता सीमा राणा ने बताया कि न्यायालय ने आजम खान की दोषसिद्धि को पूरी तरह बरकरार रखा है और उनकी अपील को खारिज कर दिया है।

इस झटके के बाद आजम खान के कानूनी दल ने आगे की रणनीति साफ कर दी है। उनके अधिवक्ता विनोद कुमार शर्मा का कहना है कि वे सेशन कोर्ट के इस निर्णय से संतुष्ट नहीं हैं और इसके खिलाफ जल्द ही उच्च न्यायालय (हाई कोर्ट) में अपील दायर करेंगे।

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