सीतापुर जेल से रिहाई मिलने वाले समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता आजम खान को लेकर मंगलवार का दिन बेहद अहम साबित हुआ। सूत्रों के मुताबिक, आजम खान लगभग 23 महीने जेल में रहने के बाद आज यानी 23 सितंबर को सुबह 7 बजे रिहा हो रहे हैं। जेल प्रशासन को सोमवार देर रात उनकी रिहाई का आदेश मिल गया था, जिसके बाद सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए।
सीतापुर से रिहाई, रामपुर जाएंगे सीधे
आजम खान की रिहाई को लेकर सीतापुर जेल के बाहर सुरक्षा का घेरा और मजबूत कर दिया गया है। प्रशासन ने अनुमान लगाया है कि बड़ी संख्या में उनके समर्थक जेल के बाहर इकट्ठा हो सकते हैं। ऐसे में पुलिस ने किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया है। रिहा होने के बाद आजम खान सीधे अपने गढ़ रामपुर के लिए रवाना होंगे, जहां उनके समर्थक उनका जोरदार स्वागत करने की तैयारी कर चुके हैं।
बीएसपी में शामिल होने की अटकलें
आजम खान की रिहाई को लेकर जहां राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ी हैं, वहीं उनके भविष्य की सियासी जमीन को लेकर कयासों का दौर भी तेज है। पिछले कुछ महीनों से लगातार यह चर्चा हो रही है कि आजम खान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और समाजवादी पार्टी, दोनों से दूरी बनाते हुए बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का दामन थाम सकते हैं।
सूत्र बताते हैं कि बीते दिनों आजम खान की पत्नी और रामपुर से पूर्व विधायक तंजीन फातिमा की मुलाकात मायावती से दिल्ली में हुई थी, हालांकि इस पर कोई आधिकारिक बयान न तो बसपा की तरफ़ से आया है और न ही आजम खान के परिवार की ओर से पुष्टि की गई है।
बसपा विधायक उमाशंकर सिंह का बयान
इस बीच बसपा के रसड़ा (बलिया) से विधायक और पार्टी के एकमात्र विधानसभा सदस्य, उमाशंकर सिंह ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यदि आजम खान बसपा में शामिल होते हैं तो पार्टी उनका स्वागत करेगी। सिंह के मुताबिक, आजम खान जैसे कद्दावर मुस्लिम नेता के आने से बसपा को ताकत मिलेगी और संगठन और मजबूत होगा। उन्होंने हालांकि यह भी साफ किया कि उन्हें मायावती और तंजीन फातिमा के बीच किसी मुलाकात की प्रत्यक्ष जानकारी नहीं है, लेकिन आजम का पार्टी में आना निश्चित रूप से फायदेमंद होगा।
रामपुर में स्वागत की तैयारी
रामपुर में आजम खान की रिहाई को लेकर उनके समर्थकों में उत्साह चरम पर है। शहरभर में बैनर-पोस्टर लगाए गए हैं और सपा कार्यकर्ता उन्हें नायक की तरह स्वागत करने की तैयारी में जुटे हैं।
आजम खान, जो लंबे समय तक समाजवादी राजनीति का चेहरा रहे हैं, उनकी रिहाई के साथ न सिर्फ़ रामपुर बल्कि प्रदेश की सियासत में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
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