सोमवार तड़के संभल में ED-CBI-IT की हाजी बंधुओं के ठिकानों पर छापेमारी

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संभल: प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और आयकर विभाग (IT) की संयुक्त टीमों ने सोमवार तड़के उत्तर प्रदेश के संभल जिले में प्रमुख मीट कारोबारी हाजी इमरान और हाजी इरफान के ठिकानों पर छापेमारी की। ये दोनों भाई स्थानीय स्तर पर ‘हाजी ब्रदर्स’ के नाम से जाने जाते हैं।

दिल्ली से रवाना हुई जांच एजेंसियों की टीमें करीब 70 वाहनों के काफिले के साथ सुबह 6 बजे संभल पहुंचीं। इस कारवाई में 100 से अधिक अधिकारी और कर्मचारी शामिल रहे। मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय अनियमितताओं की जांच के तहत यह छापेमारी हाजी बंधुओं के आवास, फैक्ट्री और उनकी कंपनी के चार कर्मचारियों के घरों पर की गई।

मुस्लिममिरर की खबर के अनुसार छापेमारी का मुख्य केंद्र संभल कोतवाली क्षेत्र के चिमयावाली गांव में स्थित इंडियन फ्रोजन फूड फैक्ट्री रही, जो हाजी इरफान के स्वामित्व में है। इसके साथ ही हयातनगर थाना क्षेत्र के सरायतरीन के भूड़ा इलाके में इरफान के आलीशान आवास को भी घेरा गया। कंपनी के कर्मचारियों के घरों पर भी तलाशी अभियान चलाया गया।

सूत्रों के अनुसार, अधिकारियों ने कई संपत्तियों और फैक्ट्री परिसर को सील करना शुरू कर दिया, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। स्थानीय लोगों ने बताया कि दर्जनों वाहनों और अधिकारियों के अचानक पहुंचने से पूरा इलाका ठप हो गया।

हाजी बंधुओं का मीट कारोबार उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश सहित तीन राज्यों में फैला हुआ है। वे कई मीट प्रोसेसिंग और फ्रोजन फूड यूनिट संचालित करते हैं। चिकन, बकरे और अन्य मांस उत्पादों के आयात-निर्यात के आधार पर उनके कारोबारी साम्राज्य की कीमत करीब 1,000 करोड़ रुपये आंकी जा रही है।

ED और CBI अधिकारियों को संदेह है कि मीट व्यापार का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग, टैक्स चोरी और हवाला लेनदेन के लिए किया जा रहा है। हालांकि अब तक किसी आधिकारिक आरोपपत्र या गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है। एजेंसियां दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड और संपत्ति विवरणों की जांच कर रही हैं।

कार्रवाई के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रांतीय सशस्त्र बल (PAC) की भारी तैनाती की गई। संभल के जिलाधिकारी और SSP ने किसी अप्रिय घटना से बचने के लिए स्थानीय निगरानी कड़ी कर दी है।

हालांकि हाजी बंधुओं ने अभी तक कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है, स्थानीय सूत्रों का कहना है कि वे अधिकारियों को पूरा सहयोग कर रहे हैं। यह छापेमारी उत्तर प्रदेश और बिहार में मीट निर्यात कारोबार से जुड़ी कथित मनी लॉन्ड्रिंग पर व्यापक कार्रवाई का हिस्सा प्रतीत होती है।

हालांकि, इस कार्रवाई ने स्थानीय व्यापारिक समुदाय और राजनीतिक पर्यवेक्षकों के बीच तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं। कई लोग पूछ रहे हैं कि प्रवर्तन एजेंसियां बार-बार मुस्लिम मीट निर्यातकों को निशाना क्यों बना रही हैं, जबकि इसी क्षेत्र में काम करने वाले कई हिंदू और जैन निर्यातक अछूते रह जाते हैं।

विपक्षी दलों ने इस कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध बताते हुए निंदा की है, जबकि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्ती (BJP) ने इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा कदम बताया है। संभल जैसे सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील जिले में प्रभावशाली मुस्लिम व्यापारिक परिवार पर छापेमारी ने सामाजिक तनाव की संभावना को लेकर भी चिंताएं बढ़ा दी हैं।

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