मिडिल ईस्ट एक बार फिर से खूनी जंग की आग में जल रहा है। इज़राइल , हमास, हिज़बुल्लाह और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने पूरे खितते को तबाही के दहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। इस खून खराबे के पीछे की कहानी लंबे समय से चली आ रही है, जिसमें मोसाद, इज़राइल की खुफिया एजेंसी, के द्वारा की गई कई हत्याओं ने आग में घी डालने का काम किया है।
मोसाद को दुनिया की सबसे खतरनाक खुफिया एजेंसियों में से एक माना जाता है, जिसने कई हमास, हिज़बुल्लाह और ईरानी नेताओं को निशाना बनाया है।
हिज़बुल्लाह के सैन्य कमांडर, इमाद मुगनिया की 2008 में दमिश्क, सीरिया में एक कार बम से हत्या कर दी गई। ईरान के शीर्ष परमाणु वैज्ञानिक, मोहसेन फ़ख़रीज़ादेह, की नवंबर 2020 में तेहरान के पास एक हाई-टेक ऑपरेशन के तहत हत्या की गई।हिज़बुल्लाह के वरिष्ठ कमांडर,हसन अल-लक्कीस को 2013 में लेबनान में गोली मार दी गई।हमास नेता,अब्दुल अज़ीज़ अल-रंतिसी को 2004 में एक इज़राइली हवाई हमले में मारा गया। इन हत्याओं से अरब इज़राइल के बीच की दुश्मनी और भी बढ़ गई।
अक्टूबर 2023 में हमास ने गाजा से इज़राइल पर अभयानक रॉकेट हमले किए, जिससे सैकड़ों लोग हताहत हुए। इसके जवाब में, इज़राइल ने भीषण हवाई हमले किए, जिसमें कई हमास नेताओं और नागरिकों की जान चली गई और लाखों लोग जख्मी और बे घर हो गए।
ईरानी राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी और विदेश मंत्री हुसैन अमीर-अब्दुल्लाहियन की हेलिकॉप्टर क्रैश में मौत, तेहरान में एक हमले में हमास नेता इस्माइल हानिया और अब हिजबुल्लाह कमांडर हसन नसरुल्ला की हत्या ने स्थिति को बेकाबू कर दिया है और दुनिया में तीसरे विश्व युद्ध का खतरा मंडलाने लगा है।
इस संकट के बीच, एक प्रमुख मुद्दा है जिसे सुलझाए बिना अमन बहाल नहीं हो सकता – और वह है फिलिस्तीन। इज़राइल-फिलिस्तीन संघर्ष दशकों से इस इलाके में खून खराबे का मुख्य कारण बना हुआ है। दुनिया को अब हथियारों से नहीं, बल्कि बातचीत और मानवीय समझौतों से इस संघर्ष को हल करने की दिशा में कदम बढ़ाने की जरूरत है। मिडिल ईस्ट ने बहुत खून-खराबा देख लिया है। फिलिस्तीन के लिए न्यायपूर्ण समाधान ही इस हिंसा को रोक सकता है और क्षेत्रीय शांति बहाल हो सकती है।अगर विश्व शक्तियाँ समय रहते इस मुद्दे का समाधान नहीं ढूंढतीं, तो यह खूनी संघर्ष पूरे विश्व को अपनी चपेट में ले सकती है।
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