मुरादाबाद: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में चर्चित कोचिंग संस्थान ‘स्कॉलर्स डेन’ (Scholars Den) की सीलिंग और उससे उपजे कानूनी व वित्तीय विवाद के बीच मुरादाबाद मंडल के कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह का जनहितैषी और सख्त रुख सामने आया है। अपनी पारदर्शी कार्यशैली और जनसेवा के लिए पहचाने जाने वाले आईएएस आंजनेय कुमार सिंह ने पूरे मामले पर उठ रहे सवालों का पटाक्षेप करते हुए स्पष्ट किया है कि प्रशासन का उद्देश्य किसी संस्थान को परेशान करना नहीं, बल्कि छात्रों की सुरक्षा, शिक्षा के अधिकार और कानून का पालन सुनिश्चित कराना है।
इसके साथ ही, शिक्षाविद् का मुखौटा पहनकर कोचिंग चलाने वाले संचालक विवेक ठाकुर के विवादित कारनामों और शिक्षा के व्यवसायीकरण की परतें भी एक-एक कर खुलने लगी हैं।
1. बच्चों का भविष्य प्राथमिकता: “पढ़ाई रुकने नहीं दी, RSD एकेडमी में कराई वैकल्पिक व्यवस्था”
विवाद की शुरुआत से ही कमिश्नर का मुख्य ध्यान कोचिंग में पढ़ रहे लगभग 1,500 छात्रों के भविष्य पर रहा।
- सील खुलवाकर दिया था मौका: कमिश्नर ने बताया कि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए उन्होंने खुद पहल करके दो बार सील खुलवाई और कोचिंग संचालक को बिल्डिंग की कंपाउंडिंग कराने व सुरक्षा मानक पूरे करने का समय दिया।
- RSD एकेडमी में शिफ्ट की कक्षाएं: जब संचालक ने सुधार करने के बजाय दोबारा अवैध संचालन जारी रखा, तब भी प्रशासन ने छात्रों का अहित नहीं होने दिया। कमिश्नर के निर्देशों पर 1 अगस्त से ‘आरएसडी एकेडमी’ (RSD Academy) में छात्रों की कक्षाएं सुचारू रूप से चलवा दी गईं, ताकि नीट (NEET) और आईआईटी (IIT) की तैयारी कर रहे बच्चों का एक भी दिन खराब न हो।
2. नियमों की अनदेखी पर कार्रवाई: “नक्शा शो-रूम का, बिना फायर NOC चल रहा था संस्थान”
3. पर्दाफाश: समाजसेवा नहीं, शिक्षा का व्यवसाय कर रहे विवेक ठाकुर
जाँच और जन शिकायतों में कोचिंग संचालक के असली चरित्र से जुड़े कई तथ्य सामने आए हैं:
- मोटी फीस का खेल: ‘स्कॉलर्स डेन’ में करीब 1,500 छात्रों से ₹3 लाख तक की भारी-भरकम फीस वसूलने और कोचिंग में बैठकर सेल्फ स्टडी करने के नाम पर भी अतिरिक्त चार्ज वसूलने के आरोप हैं। खुद कोचिंग संचालक ने सोशल मीडिया पोस्ट में शहर का बड़ा टैक्सपेयर होने का दावा किया, जिससे साफ है कि शिक्षा को किस स्तर पर व्यावसायिक लाभ का जरिया बनाया गया।
- स्कूल टाइम में बिना मान्यता कक्षाएं: सुबह 8 से रात 8 बजे तक 8वीं से 12वीं तक की कक्षाएं चलाई जा रही थीं। किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड से संबद्ध न होने के बावजूद स्कूल टाइम में बच्चों को बुलाकर स्कूलों में फर्जी हाजिरी का खेल खेला जा रहा था।
- पार्टनरों और मकान मालिकों को झटका: आरोप है कि 2012 में कोचिंग की शुरुआत करने के बाद शुरुआती पार्टनरों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया और सुचित्रा कॉम्प्लेक्स समेत कई किराए की इमारतों का लाखों रुपये का किराया नहीं चुकाया गया, जिसके मुकदमे कोर्ट में लंबित हैं।
- विधायक बनने की हसरत और 5-5 बाउंसर: कोचिंग संचालक पर 5-5 बाउंसरों के घेरे में रहकर राजनीतिक जमीन तैयार करने (विधायक बनने की हसरत) और अधिकारियों का नाम लेकर कर्मचारियों, शिक्षकों व अभिभावकों को धमकाने के गंभीर आरोप सामने आए हैं।
4. व्यक्तिगत आरोपों का सच: “अवैध वसूली और फर्जी बिलों पर बनाई दूरी”
कोचिंग संचालक द्वारा लगाए गए रंजिश के आरोपों पर कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह ने सच्चाई सामने रखी:
- ‘उदीषा महोत्सव’ का सच: कमिश्नर के अनुसार, ‘उदीषा साहित्यिक महोत्सव’ के दौरान ‘पूर्वांचल समिति’ के नाम पर अवैध वसूली के आरोप और भाई की कंपनी के जरिए फर्जी बिल-वाउचर पेश किए जाने के बाद संचालक को आयोजन से बाहर किया गया था।
- “नजदीकी का दावा गलत”: कमिश्नर ने साफ किया कि विवेक ठाकुर बीते साढ़े पांच वर्षों में केवल छात्रों की समस्याओं को लेकर 9 बार ही उनसे मिले हैं। प्रशासनिक अधिकारियों के नाम का इस्तेमाल कर लोगों पर धौंस जमाने की छूट किसी को नहीं दी जा सकती।
5. बकाएदारों की बाढ़ और एफआईआर की जाँच जारी
कमिश्नर की प्रशासनिक सख्ती के बाद पीड़ित पक्ष खुलकर सामने आने लगे हैं:
- सुरक्षा एजेंसी और एयर टिकट बकाया: सागर सिक्योरिटी कंपनी के ₹35 लाख से अधिक के बकाए और ट्रैवल एजेंसी के ₹10 लाख के बकाए को लेकर पुलिस में दर्ज मुकदमों (FIRs) की जाँच जारी है।
- छात्रों व अभिभावकों का प्रदर्शन: ठगी और धोखाधड़ी के आरोपों के बाद आक्रोशित छात्रों व अभिभावकों ने भी प्रदर्शन कर अपने पैसों और भविष्य की सुरक्षा की माँग की है।
कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह ने स्पष्ट किया कि मुरादाबाद विकास प्राधिकरण (MDA) और जिला प्रशासन की कार्रवाई पूरी तरह नियमानुकूल और सुरक्षा मानकों पर आधारित है:
- सुरक्षा मानकों से समझौता नहीं: लखनऊ कोचिंग अग्निकांड जैसी घटनाओं से सबक लेते हुए बिना फायर एनओसी (Fire NOC) और आपातकालीन निकास के बेसमेंट में चल रही कक्षाओं पर रोक लगाना छात्रों की जान की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी था।
- स्वीकृत मानचित्र का उल्लंघन: जिस इमारत में कोचिंग चल रही थी, उसका नक्शा व्यावसायिक ‘क्लॉथिंग शो-रूम’ के रूप में स्वीकृत था। बार-बार नोटिस देने के बावजूद जब मानकों को पूरा नहीं किया गया, तब जाकर सीलिंग का कदम उठाया गया।
मुरादाबाद में आईएएस आंजनेय कुमार सिंह की छवि हमेशा से एक संवेदनशील और कड़े फैसले लेने वाले अधिकारी की रही है। ‘स्कॉलर्स डेन’ मामले में भी उन्होंने यह साफ कर दिया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। एक तरफ जहाँ उन्होंने अवैध निर्माण और सुरक्षा में लापरवाही पर कड़ा प्रशासनिक शिकंजा कसा, वहीं दूसरी तरफ छात्रों की कक्षाओं को बिना रुकावट शुरू करवाकर साबित कर दिया कि प्रशासन के लिए जनहित और बच्चों का भविष्य ही सर्वोपरि है।
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