मुरादाबाद: ‘स्कॉलर्स डेन’ सील; विवेक ठाकुर के फर्जीवाड़े की खुली पोल, कमिश्नर का जनहितैषी रुख सख्त

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Moradabad Scholars Den Cieling Controversy
मुरादाबाद: 'स्कॉलर्स डेन' विवाद में कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह की दोटूक—"जनहित और कानून सर्वोपरि; बच्चों के भविष्य से नहीं होगा खिलवाड़"

मुरादाबाद: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में चर्चित कोचिंग संस्थान ‘स्कॉलर्स डेन’ (Scholars Den) पर हुई प्रशासनिक सीलिंग के बाद अब इसके संचालन, वित्तीय गड़बड़ियों और शिक्षा के व्यवसायीकरण की पूरी सच्चाई सामने आने लगी है। एक तरफ जहाँ मुरादाबाद विकास प्राधिकरण (MDA) और जिला प्रशासन ने अग्निशमन मानकों की अनदेखी और स्वीकृत मानचित्र के उल्लंघन पर सख्त कानूनी कदम उठाया है, वहीं दूसरी तरफ कोचिंग संचालक विवेक ठाकुर के विवादित चाल, चेहरा और चरित्र का भी पर्दाफाश हुआ है।

1. बिना Fire NOC और नक्शे के उल्लंघन पर प्रशासनिक शिकंजा

लखनऊ कोचिंग अग्निकांड के बाद जिला प्रशासन और एमडीए द्वारा चलाए गए जाँच अभियान में ‘स्कॉलर्स डेन’ की गंभीर तकनीकी व सुरक्षा खामियाँ उजागर हुई थीं:

  • शो-रूम के नक्शे पर अवैध संचालन: जिस इमारत में कोचिंग चलाई जा रही थी, उसका नक्शा केवल एक कमर्शियल ‘क्लॉथिंग शो-रूम’ के नाम पर पास कराया गया था। शैक्षणिक संस्थान के तय मानकों को दरकिनार कर बेसमेंट में अवैध रूप से कक्षाएं संचालित की जा रही थीं।
  • सुरक्षा मानकों और Fire NOC की अनदेखी: अग्निशमन विभाग (Fire Department) की जाँच में पाया गया कि आपातकालीन निकास और सुरक्षा उपकरणों के बिना ही सैकड़ों बच्चों की जान जोखिम में डालकर कक्षाएं चलाई जा रही थीं।
  • छात्रों के भविष्य की सुरक्षा प्राथमिकता: सीलिंग की कार्रवाई के बावजूद छात्रों की पढ़ाई का नुकसान न हो, इसके लिए प्रशासनिक समन्वय के जरिए 1 अगस्त से ‘आरएसडी एकेडमी’ (RSD Academy) में वैकल्पिक व्यवस्था बनाकर सभी कक्षाओं को सुचारू रूप से शुरू करा दिया गया।

2. समाजसेवा का मुखौटा और शिक्षा का करोड़ों का कारोबार

जाँच और सामने आई शिकायतों से स्पष्ट हुआ है कि कोचिंग के नाम पर व्यावसायिक मुनाफाखोरी का बड़ा खेल खेला जा रहा था:

  • भारी-भरकम फीस वसूली: संस्थान में पढ़ रहे लगभग 1,500 छात्रों से प्रति छात्र 3 लाख रुपये तक की मोटी फीस वसूली जाती है। यहाँ तक कि कोचिंग परिसर में बैठकर सेल्फ स्टडी करने के लिए भी बच्चों से अतिरिक्त शुल्क वसूला जाता था।
  • टैक्सपेयर के दावे से उजागर हुआ मुनाफा: खुद कोचिंग संचालक द्वारा सोशल मीडिया पर शहर का सबसे बड़ा टैक्सपेयर होने का दावा किए जाने के बाद यह सवाल खड़ा हुआ है कि पीतल निर्यात के बड़े व्यापारिक केंद्र मुरादाबाद में एक कोचिंग चलाकर करोड़ों का टैक्स देना शिक्षा के व्यवसायीकरण के किस स्तर को दर्शाता है।

3. स्कूल टाइम में फर्जीवाड़ा और बिना बोर्ड मान्यता के कोचिंग

  • बिना मान्यता के क्लास 8 से 12वीं तक का संचालन: कोचिंग में सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक कक्षाएं चलाई जाती हैं। 10वीं और 12वीं के छात्रों का दाखिला लेने के बावजूद संस्थान के पास किसी भी मान्यता प्राप्त शिक्षा बोर्ड (CBSE, ICSE या UP Board) की संबद्धता नहीं है।
  • स्कूलों के साथ फर्जी हाजिरी का खेल: स्कूल टाइमिंग के दौरान बच्चों को कोचिंग में बिठाया जाता है, जिससे यह साफ है कि विभिन्न स्कूलों के साथ मिलकर छात्रों की फर्जी हाजिरी दर्ज कराई जा रही थी।

4. पार्टनरों से धोखेबाजी, बकाया किराया और बाउंसर कल्चर

कोचिंग संचालक के पुराने इतिहास और कार्यप्रणाली को लेकर भी कई गंभीर बातें सामने आई हैं:

  • शुरुआती साथियों को निकाला बाहर: 2012 में संस्थान की शुरुआत करने के बाद जैसे ही कोचिंग का धंधा जमा, विवेक ठाकुर ने उन शुरुआती पार्टनरों को ही बाहर का रास्ता दिखा दिया जिनके साथ मिलकर काम शुरू किया गया था।
  • मकान मालिकों का किराया हड़पने के आरोप: सुचित्रा कॉम्प्लेक्स समेत जिन-जिन इमारतों में किराए पर कोचिंग चलाई गई, उनमें से कई का लाखों रुपये का किराया नहीं चुकाया गया। किराया वसूली के मामले आज भी अदालतों में लंबित हैं।
  • 5-5 बाउंसर और विधायक बनने की हसरत: किसी राजनेता की तर्ज पर 5-5 बाउंसरों के सुरक्षा घेरे में रहकर चलने और मुरादाबाद से विधायक बनने की राजनीतिक महत्त्वाकांक्षा पालने के आरोप भी सामने आए हैं। सुरक्षा के इस तामझाम का इस्तेमाल शिक्षकों, कर्मचारियों और अभिभावकों पर धौंस जमाने के लिए किए जाने की शिकायतें मिली हैं।

5. कमिश्नर पर झूठे आरोप और जनहितैषी प्रशासनिक छवि

  • कमिश्नर पर लगाए गए आरोपों का सच: कोचिंग संचालक विवेक ठाकुर द्वारा यह आरोप लगाया गया कि उदीषा साहित्य महोत्सव के ₹50 लाख के बिलों के विवाद और व्यक्तिगत रंजिश के चलते उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। हालाँकि, प्रशासनिक सूत्रों और जाँच रिपोर्टों के अनुसार, ‘उदीषा महोत्सव’ के दौरान पूर्वांचल संस्था के नाम पर अनधिकृत गतिविधियों और भाई की कंपनी के जरिए फर्जी बिल-वाउचर पेश करने की कोशिश उजागर होने पर नियमबद्ध तरीके से गलत दावों को निरस्त किया गया था।
  • कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह की जनहितैषी कार्यशैली: अपनी पारदर्शी कार्यशैली और सख्त जनहितैषी छवि के लिए पहचाने जाने वाले IAS आंजनेय कुमार सिंह का हमेशा से यह रुख रहा है कि कानून और बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा। सीलिंग के तुरंत बाद बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए खुद पहल कर RSD एकेडमी में कक्षाओं का वैकल्पिक संचालन शुरू कराना यह साबित करता है कि प्रशासन के लिए छात्रों का हित सर्वोपरि है। पूर्व में भी मंडल में माफियाओं पर नकेल कसने और जनसमस्याओं के त्वरित समाधान के लिए उनकी सराहना होती रही है।

6. ‘उदीषा महोत्सव’ में फर्जीवाड़ा और बकाएदारों की एफआईआर

  • दर्जनों बकाएदारों की FIRs: प्रशासनिक छत्रछाया और अधिकारियों के नाम का झूठा रौब हटने के बाद पीड़ित पक्ष खुलकर सामने आए:
    • सागर सिक्योरिटी: सुरक्षा गार्ड्स व बाउंसर मुहैया कराने वाली फर्म के ₹35 लाख से अधिक का भुगतान अटकाया गया।
    • मल्होत्रा ट्रैवल्स: बॉलीवुड हस्तियों के हवाई टिकटों (Air Tickets) के ₹10 लाख से अधिक का बकाया न देने और मांगने पर धमकी देने के आरोप में एफआईआर दर्ज हुई।
    • धमकी के दावे: दूसरी तरफ संचालक द्वारा समाचार पत्र पर हाथ से लिखकर धमकी मिलने का दावा कर मामले को भटकाने की कोशिश की गई, जबकि पुलिस और प्रशासन कानूनी मुकदमों की निष्पक्ष जाँच में जुटे हैं।

‘स्कॉलर्स डेन’ विवाद ने यह साफ कर दिया है कि सुरक्षा नियमों की अनदेखी, व्यावसायिक मुनाफाखोरी और धोखाधड़ी के मामलों में कानून सभी के लिए समान है। एक तरफ जहाँ जिला प्रशासन और कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह की जनहितैषी सोच के कारण छात्रों की पढ़ाई RSD एकेडमी में स्थानांतरित कर उनके भविष्य को सुरक्षित किया गया है, वहीं दूसरी तरफ विवेक ठाकुर के खिलाफ दर्ज FIRs, बकाए के मामलों और नक्शे के उल्लंघन पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई जारी है।