“ख़ुत्बात-ए-मोदी: लाल क़िले की फसील से” का लोकार्पण — धर्मेंद्र प्रधान बोले, प्रधानमंत्री के भाषण भारत के विकास का दस्तावेज़

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नई दिल्ली: राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद (NCPUL) द्वारा प्रकाशित ऐतिहासिक पुस्तक ‘ख़ुत्बात-ए-मोदी: लाल क़िले की फसील से’ का लोकार्पण सोमवार को शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने शास्त्री भवन, नई दिल्ली में किया। यह पुस्तक वर्ष 2014 से 2025 तक स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाल क़िले से दिए गए भाषणों का संग्रह है, जो देश के विकास यात्रा का जीवंत दस्तावेज़ मानी जा रही है।

समारोह में परिषद के निदेशक डॉ. शम्स इक़बाल ने शिक्षा मंत्री का स्वागत करते हुए कहा कि यह संकलन उर्दू भाषा और राष्ट्रीय विमर्श के बीच पुल का काम करेगा। उन्होंने कहा कि मोदी जी के नेतृत्व ने उर्दू भाषा को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का अवसर दिया है, जो ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की दिशा में एक सार्थक कदम है।

इस अवसर पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस भाषणों में भारत की विकास गाथा सजीव रूप से झलकती है। उन्होंने कहा कि ‘ख़ुत्बात-ए-मोदी’ परिषद के प्रकाशन मिशन की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगी।

प्रधान ने कहा — “प्रधानमंत्री मोदी जी के भाषणों में ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मंत्र के साथ भारत के परिवर्तन की स्पष्ट दिशा दिखाई देती है। इनमें मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, स्वच्छ भारत मिशन, आयुष्मान भारत, उज्ज्वला योजना और आत्मनिर्भर भारत जैसे कार्यक्रमों की अवधारणा और क्रियान्वयन का खाका मिलता है।”

उन्होंने कहा कि ये भाषण केवल राजनीतिक वक्तव्य नहीं, बल्कि नए भारत के निर्माण का रोडमैप हैं जो नागरिकों को अपनी जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करते हैं। प्रधान ने परिषद को निर्देश दिया कि यह पुस्तक देश की प्रत्येक लाइब्रेरी में उपलब्ध कराई जाए ताकि अधिक से अधिक पाठक प्रधानमंत्री के ‘नेशन फ़र्स्ट’ विज़न को समझ सकें।

इस अवसर पर डॉ. विनीत जोशी (सचिव, उच्च शिक्षा विभाग), सुश्री मनमोन कौर (संयुक्त सचिव, शिक्षा मंत्रालय), चामो कृष्ण शास्त्री (अध्यक्ष, भारतीय भाषा समिति) और प्रो. नैमा खातून (कुलपति, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय) सहित शिक्षा मंत्रालय के अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

शिक्षा मंत्री ने अंत में राष्ट्रीय उर्दू परिषद के निदेशक डॉ. शम्स इक़बाल और उनकी टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह पुस्तक उर्दू पाठकों तक प्रधानमंत्री मोदी के 12 वर्षों की ऐतिहासिक उपलब्धियाँ और राष्ट्र निर्माण का दृष्टिकोण पहुँचाने का माध्यम बनेगी।

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