एसडीएम कोर्ट में भ्रष्टाचार और दलाली के खिलाफ वकीलों का फूटा गुस्सा, 13-14 जुलाई को कार्य बहिष्कार का ऐलान

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बदायूँ/सहसवान: उप जिलाधिकारी (एसडीएम) न्यायालय में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार, लेट-लतीफी और अव्यवस्थाओं को लेकर बार एसोसिएशन सहसवान ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। बार भवन में आयोजित एक आपात बैठक में अधिवक्ताओं ने न्यायालय की न्यायिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए और सर्वसम्मति से दो दिनों तक न्यायिक कार्य का पूर्ण बहिष्कार करने का निर्णय लिया।

‘बिना सुविधा शुल्क नहीं होते काम, दलालों का बढ़ा प्रभाव’

बैठक को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने आरोप लगाया कि एसडीएम न्यायालय में मुकदमों और पत्रावलियों के निस्तारण में अनावश्यक देरी की जा रही है। आरोप है कि बिना ‘सुविधा शुल्क’ (रिश्वत) के फाइलों पर समय से आदेश जारी नहीं किए जा रहे हैं। इसके अलावा, तहसील परिसर में बाहरी दलालों का दखल और प्रभाव इस कदर बढ़ गया है कि दूर-दराज से आने वाले गरीब वादकारियों का आर्थिक और मानसिक शोषण हो रहा है।

चेतावनी: समाधान नहीं हुआ तो 15 जुलाई से बड़ा आंदोलन

बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि इन गंभीर समस्याओं और कोर्ट में व्याप्त भ्रष्टाचार के संबंध में पहले भी कई बार उच्च प्रशासनिक अधिकारियों को लिखित शिकायतें दी जा चुकी हैं, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। प्रशासन के इसी ढुलमुल रवैए के विरोध में अधिवक्ताओं ने 13 और 14 जुलाई को दो दिवसीय सांकेतिक हड़ताल व न्यायालय कार्य बहिष्कार का फैसला किया है।

एसोसिएशन ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि यदि इन दो दिनों के भीतर समस्याओं का ठोस समाधान नहीं निकाला गया, तो 15 जुलाई को दोबारा बैठक कर एक बड़े और अनिश्चितकालीन आंदोलन की रूपरेखा तय की जाएगी।

बैठक में यह रहे मौजूद

इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता बार एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेंद्र गोपाल सक्सेना ने की, जबकि कुशल संचालन महासचिव सोमवीर सिंह यादव द्वारा किया गया। बैठक में तहसील के तमाम वरिष्ठ व कनिष्ठ अधिवक्ता भारी संख्या में मौजूद रहे और सभी ने एकजुट होकर इस आंदोलन का पुरजोर समर्थन किया।

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