रामपुर(रिज़वान ख़ान): हमारे देश में अनेक नदियां हैं और यहां की परंपरा रही है कि धार्मिक एतबार से नदियों को भी मां के लक़ब से पुकारा जाता है। वैसे भी नदियां प्राकृतिक का वरदान है जो हमारे कृषि प्रधान देश में किसानों को उनकी फसलों को सहायक में सहायक बनती हैं। अब बात करते हैं रामपुर की उस ऐतिहासिक रेवती नदी की जो इंसानों के मनमाने रवैया के चलते विलुप्त हो चुकी थी। लेकिन सीडीओ नंदकिशोर कलाल की अगुवाई में इस ऐतिहासिक नदी को फिर से पुनर्जीवित किया जा चुका है।
ब्रिटिश साम्राज्य के दौरान उत्तर प्रदेश का जनपद रामपुर रियासत हुआ करता था। उस दौर में यहां पर गंगा, कोसी, पीलाखार, भाखड़ा, बैगुल , गागन और रेवती नदी अपने जल प्रवाह से किसने की फसलों को सींचनें का कार्य किया करती थीं। वक्त बदला और रियासत का विलय भारत गणराज्य में हुआ जिसके चलते रामपुर रियासत की सीमा को भी घटाकर सीमित कर दिया गया। रामपुर रियासत को जिले का दर्जा मिला इसके बाद धीरे-धीरे समय बीतता गया और यहां पर बहने वाली ऐतिहासिक रेवती नदी जल सूख जाने के बाद विलुप्त हो गई। नदी को पाट कर कुछ लोगों ने अपने निजी स्वास्थ्य के चलते इसके पूरे हिस्से को कब्जा लिया। जल संरक्षण को लेकर चलाई जा रही योजनाओं के तहत यहां पर तैनात सीडीओ नंदकिशोर कलाल ने अन्य आला अधिकारियों के साथ मिलकर इसको पुनर्जीवित करने का मन बनाया। सीडीओ की दिलचस्पी के चलते यह नदी मनरेगा के अलावा अन्य योजनाओं केवल पर अब पुनर्जीवित हो चुकी है।
गौरतलब है कि रेवती जनपद रामपुर की प्रसिद्ध नदी कोसी की एक सहायक नदी है और एक समय वह था जब इसकी धारा प्रभाव से किसानों के खेत लहराया करते थे। रेवती नदी का इतिहास काफी पुराना है लेकिन यह कई दशक पहले अपना वजूद को खो चुकी थी जिसे प्रशासन की कारगुजारी के चलते एक बार फिर से पुनर्जीवित किया जा चुका है। रेवती नदी की खुदाई के बाद क्षेत्र के किसान भी काफी गदगद नजर आ रहे हैं और प्रशासन के इस बेहतरीन कार्य की सराहना करते नहीं थक रहे हैं।
सीडीओ नंदकिशोर कलाल के मुताबिक चमरौआ विकासखंड क्षेत्र के नयागांव सहित दर्जन भर गांव के पुराने राजस्व नक्शो के आधार पर साढ़े बारह किलोमीटर लंबी ऐतिहासिक रेवती नदी को एक बार फिर से पुनर्जीवित किया जा चुका है। यह एक बड़ी उपलब्धि है जिससे जहां जल संरक्षित रहेगी वहीं किसानों को भी इससे बड़ा फायदा होने वाला है।
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