तमिलनाडु में ‘थलपति’ विजय की सरकार तय: VCK और IUML के समर्थन से पलटी बाजी, जानें बहुमत का पूरा गणित

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चेन्नई, 9 मई 2026: तमिलनाडु की सियासत में बड़ा ट्विस्ट! सरकार बनाने की दौड़ में तेजी से आगे बढ़ रहे अभिनेता-पolitician विजय को शनिवार को दोहरी राजनीतिक राहत मिली। विदुथलाई चिरुथैगल काची (VCK) ने उनकी पार्टी तमिलागा वेत्री कझगम (TVK) को बिना शर्त समर्थन देने का ऐलान कर दिया। इसके कुछ ही देर बाद इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) ने भी विजय की झोली में समर्थन डाल दिया।

राज्य में पिछले कई दिनों से राजनीतिक गतिरोध चल रहा था। TVK को सरकार बनाने के लिए 118 विधायकों का जादुई आंकड़ा चाहिए था, जो उनके पास नहीं था। इसी कारण विजय को लगातार तीन दिनों में तीन बार राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से मिलना पड़ा। लेकिन अब VCK के दोनों विधायकों और IUML के समर्थन से TVK की संख्या मजबूत हो गई है।

VCK का समर्थन: डिप्टी CM की अफवाहें झूठी निकलीं

खबरें थीं कि VCK समर्थन के बदले डिप्टी सीएम पद की मांग कर रही है। लेकिन पार्टी ने इन अफवाहों को खारिज करते हुए बिना किसी शर्त के समर्थन का फैसला किया। TVK महासचिव अधव अर्जुना ने VCK का समर्थन पत्र दिखाते हुए कहा, “पार्टी अब विजय के साथ पूरी तरह खड़ी है।” VCK विधायक दल के नेता वन्नी अरासु ने पत्र में लिखा कि पार्टी अध्यक्ष थोल थिरुमावलवन के निर्देश पर उनके दोनों विधायक TVK सरकार को समर्थन देंगे।

IUML का यू-टर्न: DMK से अलग होकर विजय के साथ

शुरुआत में IUML को DMK के साथ देखा जा रहा था, लेकिन अब उसने भी TVK को समर्थन दे दिया। इस फैसले से विजय की सरकार बनाने की राह पूरी तरह साफ हो गई है।

विजय के आंकड़े: 108 से 107, फिर भी बहुमत

चुनाव में TVK ने 108 सीटें जीती थीं, लेकिन विजय ने व्यक्तिगत रूप से दो सीटों पर जीत हासिल की। ऐसे में एक सीट छोड़नी पड़ेगी, जिसके बाद पार्टी की प्रभावी संख्या 107 रह जाएगी। VCK और IUML के समर्थन से अब 118 का आंकड़ा पार हो गया है।

चुनौतियां बरकरार: कम बहुमत वाली गठबंधन सरकार का क्या होगा?

संख्या पूरी होने के बावजूद विजय के सामने बड़ी चुनौती है। पांच साल तक इतने कम बहुमत वाली गठबंधन सरकार चलाना आसान नहीं होगा। अगर कुछ विधायक नाराज होकर बगावत कर देते हैं, तो सरकार संकट में फंस सकती है। कई पार्टियों ने “बाहरी समर्थन” दिया है, यानी वे सरकार को सपोर्ट तो करेंगी, लेकिन महत्वपूर्ण मुद्दों पर DMK का साथ भी दे सकती हैं। ऐसे में सहयोगी दलों की मांगें मानने का दबाव बना रहेगा।

तमिलनाडु विधानसभा में अब TVK सरकार का रास्ता साफ है, लेकिन स्थिरता की जंग अभी बाकी है। क्या विजय इस गठबंधन को एकजुट रख पाएंगे?

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