नई दिल्ली | 26 फरवरी 2026: जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के अध्यक्ष सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने गज़ा में जारी गंभीर मानवीय संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इज़राइल दौरे पर गहरी चिंता और निराशा व्यक्त की है। मीडिया को जारी एक बयान में उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब गज़ा इतिहास की सबसे बड़ी मानवीय तबाही का सामना कर रहा है, प्रधानमंत्री का इज़राइली नेतृत्व के साथ सार्वजनिक मेल-मिलाप भारतीयों के एक बड़े वर्ग के लिए दुखद है।
भारत की ऐतिहासिक छवि को लगा धक्का
हुसैनी ने कहा कि प्रधानमंत्री के इस दौरे और उनके सार्वजनिक रुख ने उन लाखों भारतीयों को निराश किया है, जो भारत को न्याय की आवाज़ और दबे-कुचले लोगों के रक्षक के रूप में देखते हैं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा:
“जब संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन गज़ा में इज़राइल की कार्रवाई को युद्ध अपराध और नरसंहार करार दे रहे हैं, तब भारत की ओर से स्पष्ट निंदा का अभाव अप्रत्याशित और पीड़ादायक है।”
नैतिक मूल्यों बनाम सामरिक हित
जमाअत के अध्यक्ष ने याद दिलाया कि भारत का इतिहास हमेशा से रंगभेद, औपनिवेशिक कब्ज़े और नस्लीय भेदभाव के विरोध का रहा है। उन्होंने कहा कि विश्व पटल पर भारत की नैतिक हैसियत सिर्फ सामरिक हितों पर नहीं, बल्कि न्याय और करुणा जैसे सभ्यतागत मूल्यों पर टिकी है। भारतीयों को उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री इस ऐतिहासिक विरासत को कायम रखेंगे।
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जमाअत-ए-इस्लामी हिंद का पक्ष
- मानवीय संकट: फिलिस्तीनी भूमि पर लंबे समय से जारी कब्ज़ा और गज़ा में हो रही तबाही केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि एक बड़ा नैतिक संकट है।
- भारत की साख: अन्याय के सामने चुप्पी या नैतिक उलझन ग्लोबल साउथ की एक मज़बूत आवाज़ के रूप में भारत की साख को कमज़ोर कर सकती है।
- आज़ादी के मूल्य: भारत की अपनी आज़ादी की लड़ाई भी औपनिवेशिक ज़ुल्म के खिलाफ थी, इसलिए भारत की आत्मा हमेशा मजलूमों (दबे-कुचले) के साथ खड़ी रहनी चाहिए।
नैतिक आवाज़ ही भारत की असली ताकत
सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने अपने बयान का समापन करते हुए कहा कि भारत की असली ताकत उसकी आर्थिक या सैन्य शक्ति नहीं, बल्कि उसकी नैतिक आवाज़ है। उन्होंने अपील की कि भारत के नेतृत्व को अपनी अंतरात्मा और सभ्यता के उन मूल्यों से मार्गदर्शन लेना चाहिए जो हमेशा सच्चाई और न्याय के पक्ष में रहे हैं।
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