जमाअत-ए-इस्लामी हिंद की बिहार चुनाव में नफरती भाषण और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण से बचने की अपील

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नई दिल्ली: जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने शनिवार को आयोजित मासिक प्रेस कांफ्रेंस में राजनीतिक दलों से बिहार विधानसभा चुनावों में नफरती भाषणों, सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और धन या बाहुबल के दुरुपयोग से बचने की अपील की है। संगठन के उपाध्यक्ष प्रो. सलीम इंजीनियर ने महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर गंभीर चिंता जताते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की।

बिहार चुनाव में जिम्मेदारी से वोटिंग की अपील

प्रो. सलीम इंजीनियर ने बिहार के मतदाताओं से बड़ी संख्या में मतदान में भाग लेने और विवेकपूर्ण तरीके से अपने लोकतांत्रिक अधिकार का इस्तेमाल करने की अपील की। उन्होंने कहा कि वोट देना केवल अधिकार नहीं बल्कि लोकतंत्र को मजबूत करने का पवित्र कर्तव्य है।

जमाअत के उपाध्यक्ष ने नागरिकों से उम्मीदवारों का मूल्यांकन उनकी ईमानदारी, विजन और गरीबी, बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे वास्तविक मुद्दों को हल करने की प्रतिबद्धता के आधार पर करने को कहा। उन्होंने चुनाव आयोग से मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट को सख्ती से लागू कर निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने की अपील की।

महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर चिंता

प्रो. सलीम ने हाल की यौन हिंसा की घटनाओं का जिक्र करते हुए महाराष्ट्र में रेप के आरोप लगाने के बाद मृत पाई गई डॉक्टर, दिल्ली की अस्पताल कर्मचारी जिसे आर्मी की नकली तस्वीरों से फंसाया गया, और ब्लैकमेल की शिकार MBBS छात्रा के मामले उजागर किए।

NCRB की ‘क्राइम इन इंडिया 2023’ रिपोर्ट का हवाला देते हुए, जिसमें महिलाओं के खिलाफ 4.48 लाख से अधिक अपराध दर्ज किए गए हैं, उन्होंने कहा कि ये घटनाएं समाज में व्याप्त बड़ी खामियों के लक्षण हैं। उन्होंने जल्द सुनवाई, पीड़ित-केंद्रित न्याय और पुलिस, न्यायपालिका तथा स्वास्थ्य कर्मियों के लिए व्यापक जेंडर-सेंसिटिविटी प्रशिक्षण की मांग की।

प्रो. सलीम ने चेतावनी देते हुए कहा कि केवल कानून से नैतिक संकट को ठीक नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, “पुलिसिंग की नाकामी के अलावा यह आध्यात्मिक और नैतिक गिरावट है। हमें कड़े कानूनों के साथ नैतिक सुधार के लिए व्यापक जन आंदोलन की जरूरत है।”

CAA विरोधी कार्यकर्ताओं के लिए जमानत की मांग

एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स (APCR) के सचिव नदीम खान ने 2020 दिल्ली दंगा मामले में CAA विरोधी कार्यकर्ताओं की बिना ट्रायल हिरासत पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि निर्दोष छात्र और कार्यकर्ता पांच साल से अधिक समय से जेल में हैं, जो “प्रक्रिया के माध्यम से सजा” के बराबर है।

नदीम खान ने दिल्ली पुलिस द्वारा बेल का विरोध करने और दंगों को “सत्ता परिवर्तन का षड्यंत्र” बताने की आलोचना करते हुए इसे पक्षपातपूर्ण और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि WhatsApp चैट और विरोध भाषण को आतंकवाद नहीं माना जा सकता।

उन्होंने उमर खालिद, खालिद सैफी, गुलफिशा, मीरान, शरजील इमाम सहित अन्य कार्यकर्ताओं की जमानत की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट से सुनवाई को प्राथमिकता देने की अपील की। खान ने कहा, “असहमति की स्वतंत्रता लोकतंत्र की आत्मा है। इसे दबाने से लोकतंत्र की नींव खतरे में पड़ जाएगी।”

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